नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। शुरुआत में ही स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े ऐलान किए वित्त मंत्री ने। देश में कैंसर और डायबिटीज के बढ़ते मामलों और दोनों रोगों के महंगे इलाज को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीवनरक्षक 17 दवाओं पर आयात शुल्क हटाने की घोषणा की। इसके परिणामस्वरूप कैंसर, डायबिटीज और अन्य गंभीर रोगों के इलाज में उपयोग होने वाली इन दवाओं की कीमत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बायोफार्मा सेक्टर में भारत की उन्नति के लिए 2026-27 के केंद्रीय बजट में ‘बायोफार्मा शक्ति’ परियोजना की घोषणा सीतारमण ने की। इस कार्यक्रम का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक बायोफार्मा हब के रूप में विकसित करना है। कोविड के बाद की दुनिया में वायरस-जनित रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लक्षण बदल रहे हैं और वायरस-जनित बीमारियों के इलाज में भी बदलाव आ रहा है। ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाना केंद्र का उद्देश्य है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं में उन्नत तकनीक, महत्वपूर्ण दवाओं का देशी उत्पादन और उनकी प्रभावशीलता व क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ‘बायोफार्मा शक्ति’ परियोजना के तहत अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि बायोफार्मा शक्ति परियोजना डायबिटीज़, कैंसर और ऑटो-इम्यून रोगों के इलाज में प्रभावी दवाओं के उत्पादन पर जोर देगी। ताकि लोग कम खर्च में इलाज करा सकें। यह परियोजना देशी उत्पादों के इलाज में एक इकोसिस्टम तैयार करेगी। मुख्य उद्देश्य गंभीर रोगों के इलाज में विदेशी महंगी दवाओं पर निर्भरता कम करना और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इलाज का अधिकार देश के हर नागरिक तक पहुंचाना है, यही मोदी सरकार का लक्ष्य है।
सरकार द्वारा दी गई सूची के अनुसार Abemaciclib, Talycabtagene autoleucel, Tremelimumab, Venetoclax, Ceritinib, Brigatinib, Darolutamide, Toripalimab, Serplulimab, Tislelizumab, Inotuzumab ozogamicin, Ponatinib, Ibrutinib, Dabrafenib, Trametinib और Ipilimumab दवाओं की कीमत कम होने की संभावना है।
इसके अलावा ‘बायोफार्मा शक्ति’ परियोजना के तहत तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) स्थापित किए जाने की घोषणा की गई। साथ ही सात अन्य संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। इस मिशन के तहत 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक नेटवर्क भी तैयार किया जाएगा – जो देशी दवाओं को बाजार में लॉन्च करने से पहले परीक्षण के लिए आवश्यक होगा। इसके अलावा सीतारमण ने बजट के मार्गदर्शक नीति के रूप में तीन कर्तव्यों की रूपरेखा भी पेश की : वृद्धि, जनता की आकांक्षा की पूर्ति और सबका साथ, सबका विकास।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रावधान?
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों के अनुसार 2023-2025 के बीच भारत में 60% लोगों की मृत्यु गैर-संक्रामक रोगों जैसे डायबिटीज और कैंसर में हुई। वहीं संक्रामक रोग और प्रसव संबंधी कारणों से होने वाली मृत्यु दर एक-चौथाई से भी कम है। दूसरी ओर भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में भारत में 9 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। इस रफ्तार से अगर डायबिटीज बढ़ती रही, तो 2025 तक प्रभावित लोगों की संख्या 15 करोड़ 60 लाख तक पहुंच जाएगी, जो बेहद चिंता का विषय है।
WHO के अनुसार डायबिटीज़, कैंसर और श्वास संबंधी समस्याओं समेत गैर-संक्रामक और दीर्घकालिक रोगों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारतीय सालाना कुल 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करते हैं। इसलिए ‘बायोफार्मा शक्ति’ परियोजना के तहत देशी दवाओं के उत्पादन में वृद्धि से खर्च कम होगा।
आयुर्वेद के प्रसार में मोदी सरकार के कदम
2026-27 के बजट में आयुर्वेद के लिए भी बड़े ऐलान किए गए। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों और योग-व्यायाम को विश्व मंच पर नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की। इस बजट में विशेष महत्व ‘आयुष’ को दिया गया, जिसका लक्ष्य भारत को विश्व का ‘वेलनेस हब’ बनाना है।
देश में तीन नए ऑल इंडिया आयुर्वेद इंस्टीट्यूट सहित आयुष फार्मेसी और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने की घोषणा की गई। साथ ही जामनगर में स्थित WHO के ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को भी अपग्रेड किया जाएगा।