जयपुरः राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मंगलवार को अपने पिता राजेश पायलट की जयंती पर टोंक (Tonk) पहुंचकर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। पायलट ने बिना नाम लिए 'सत्ता के अहंकार' पर जो तंज कसा है, उसके सियासी गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। पायलट ने कहा कि राजनीति जनता के दम पर होती है और जो नेता लोगों से दूर होकर घमंड में डूब जाते हैं, जनता उन्हें नकार देती है।
'सत्ता का गुरूर और जनता की दूरी...'
पायलट ने नेताओं को आईना दिखाते हुए कहा, 'जब आप लोगों से दूर हो जाएंगे और घमंड-अहंकार की राजनीति करेंगे, तो जनता के बीच दूरी बन जाती है। राजनीति आत्मीयता का संबंध है। अगर सत्ता का इतना गुरूर हो जाएगा, तो एक दिन जनता आपको निश्चित रूप से नकार देगी।' उनके इस बयान को पुरानी गुटबाजी और वर्तमान सत्ता पक्ष, दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
'डबल इंजन सरकार में राजस्थान का नाम तक नहीं'
कल 11 फरवरी को पेश होने वाले राजस्थान बजट से पहले पायलट ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। पायलट ने कहा कि केंद्र के बजट में राजस्थान का नाम तक नहीं आया, जबकि यहां डबल इंजन की सरकार है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को कल के बजट में 'बेरोजगारी' को पहली प्राथमिकता देना चाहिए। टोंक का पुल और मेडिकल इंस्टीट्यूट बनकर तैयार हैं, लेकिन सरकार 'कांग्रेस का काम' समझकर उन्हें शुरू नहीं कर रही है।
बजट के लिए इन मुद्दों पर भेजे सुझाव
सचिन पायलट ने बताया कि मैंने रेल परियोजना, सिंचाई परियोजना, बेरोजगारी और निवेश से जुड़े लगभग सभी मुद्दों पर बजट के लिए राज्य सरकार को सुझाव भेजे हैं। अब कल बजट पेश होने के बाद पता चलेगा उसमें जनता के लिए क्या है ? मैं चाहता हूं कि सरकार सिर्फ वादे न करे, बल्कि उसे पूरा भी करे। जो पहले 4 लाख भर्ती निकाली थीं, उसका हिसाब भी दे।
पिता को याद कर भावुक हुए पायलट
राजेश पायलट की जयंती पर टोंक में दिव्यांग शिविर लगाने के बाद सचिन पायलट ने निजी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, 'मैंने पिता से सीखा कि समय कितना भी मुश्किल हो, हमेशा मुस्कुराते रहो। संघर्ष के दिनों के साथियों को कभी मत भूलो। लोग कहते हैं कि मैं कम मुस्कुराता हूं, लेकिन साहब (राजेश पायलट) हमेशा मुस्कुराते रहते थे।'