जयपुरः राजस्थान सरकार द्वारा 11 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट को लेकर युवाओं में खासा उत्साह और उम्मीदें देखने को मिल रही हैं। आदिवासी बाहुल इस जिले में शिक्षा और रोजगार को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की आस युवा वर्ग इस बजट से लगाए बैठा है। प्रतापगढ़ जिले के युवाओं का कहना है कि क्षेत्र में महाविद्यालय और एग्रीकल्चर कॉलेज तो स्थापित किए गए हैं, लेकिन वहां स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। कई कॉलेजों में शिक्षक और सहायक कर्मचारियों के अभाव में विद्यार्थियों को पूरी तरह से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
वहीं एग्रीकल्चर कॉलेज जिले से काफी दूर होने के कारण छात्रों को आवागमन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़कें जर्जर हैं और बिजली की समस्या भी बनी रहती है। युवाओं ने यह भी बताया कि टीएसपी क्षेत्र होने के बावजूद यहां रोजगार के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण छात्र उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाते हैं। वहीं रोजगार की तलाश कर लेते हैं, जिससे क्षेत्र में पलायन लगातार बढ़ रहा है। युवाओं की मांग है कि सरकार बजट में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की ठोस योजनाएं शामिल करें, ताकि छात्रों को बाहर न जाना पड़े। इसके साथ ही छात्र संघ चुनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। युवाओं का कहना है कि छात्र संघ चुनाव नहीं होने से छात्र राजनीति और नेतृत्व क्षमता का विकास नहीं हो पा रहा है। कॉलेजों में छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए एक मजबूत मंच की आवश्यकता है, जो छात्र संघ चुनाव से ही संभव है।
कुल मिलाकर प्रतापगढ़ जिले के युवाओं की मुख्य मांगें शिक्षा में स्टाफ की पूर्ति, सड़कों और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का सुधार, स्थानीय रोजगार के अवसर और छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर हैं। अब देखना यह होगा कि 11 तारीख को पेश होने वाला राज्य बजट युवाओं की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है। इसी कड़ी में राज्य कर्मचारी और प्राइवेट कर्मचारियों ने अपनी मांगें और अपेक्षाएं साझा की हैं। सबसे पहले राज्य कर्मचारियों की बात करें, तो वे वेतन वृद्धि और पेंशन में सुधार सहित अन्य उम्मीद कर रहे हैं। वहीं प्राइवेट कर्मचारियों की भी अपनी उम्मीदें हैं। वे स्थायी रोजगार और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं, उनका मानना है कि अगर सरकार इस बजट में प्राइवेट सेक्टर को भी ध्यान में रखे, तो इससे रोजगार के नए और अधिक अवसर पैदा हो सकते हैं। वहीं आने वाले बजट को लेकर जोधपुर की विभिन्न महिलाओं से बातचीत के दौरान महंगाई को लेकर चिंता और अपेक्षाएं साफ तौर पर सामने आईं। महिलाओं का कहना है कि घर का पूरा बजट संभालने की जिम्मेदारी अधिकतर महिलाओं पर होती है। ऐसे में अगर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम लगातार बढ़ते रहेंगे, तो घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
महिलाओं ने बताया कि वर्तमान समय में रसोई गैस, दाल, सब्जी, आटा, तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पहले ही आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। इसके साथ ही सोने-चांदी के बढ़ते दामों ने भी महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है, उनका कहना है कि शादी-ब्याह और पारिवारिक जरूरतों के लिए आभूषण खरीदना अब मुश्किल होता जा रहा है।