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'पत्नी ने पति पर केस करके क्रूरता की', राजस्थान की अदालत ने खत्म की 32 साल पुरानी शादी

कानून की नजर में वैवाहिक जीवन में केवल शारीरिक हिंसा को ही क्रूरता नहीं माना जाता। बेवजह के कानूनी मुकदमों में उलझाना, मानसिक तनाव देना और बिना किसी वैध कारण के सालों तक अलग रहना भी तलाक के लिए पुख्ता आधार बन सकता है।

By लखन भारती

Feb 07, 2026 11:44 IST

जयपुरः राजस्थान के पारिवारिक न्यायालय (प्रथम) ने वैवाहिक संबंधों और 'मानसिक क्रूरता' को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जज आरती भारद्वाज ने एक पति की याचिका को स्वीकार करते हुए, 29 अप्रैल 1994 को हुए विवाह को आधिकारिक रूप से खत्म करने (तलाक) के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने माना कि अगर जीवनसाथी केवल कानूनी उलझनों और विवादों के जरिए प्रताड़ित करे, तो वह 'क्रूरता' की श्रेणी में आता है।

8 साल का अलगाव और मुकदमों का जाल

अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, यह जोड़ा अक्टूबर 2017 से अलग रह रहा था। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने न केवल संपत्ति विवाद और बंटवारे के दावों के जरिए उसे परेशान किया, बल्कि कई दीवानी और आपराधिक मुकदमे भी दर्ज कराए।

अपने बचाव में सबूत पेश नहीं कर पाई पत्नी

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कई मुख्य टिप्पणियां कीं, जिसमें यह माना गया कि पत्नी के इस व्यवहार से पति को गंभीर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। केस में तथ्यों का अभाव भी स्पष्ट रूप से देखा गया। पत्नी ने अपने बचाव में कोई ठोस दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए और वह पति द्वारा लगाए गए कई गंभीर आरोपों का खंडन भी नहीं कर सकीं।

'रिश्ता सुधारने या साथ रहने की कोई इच्छा नहीं'

साथ ही, कोर्ट ने इस बात को विशेष रूप से नोट किया कि पिछले 8 सालों के अलगाव के बावजूद पत्नी ने 'धारा 9' (विवाह अधिकारों की बहाली) के तहत कोई याचिका नहीं लगाई। इन परिस्थितियों से यह साफ होता है कि उनके मन में रिश्ता सुधारने या साथ रहने की कोई इच्छा नहीं थी, जिसे न्यायालय ने क्रूरता और अभित्यजन का आधार माना।

कानून की नजर में क्या है आधार ?

इस मामले में जज ने हिंदू विवाह अधिनियम की दो प्रमुख धाराओं को आधार मानते हुए तलाक की डिक्री जारी की है। कोर्ट ने सबसे पहले धारा 13(1)(i-क) का उल्लेख किया, जो 'क्रूरता' (Cruelty) के आधार पर विवाह समाप्त करने का प्रावधान देती है। इसके साथ ही, धारा 13(1)(i-ख) यानी 'अभित्यजन' (Desertion) को भी आधार बनाया गया, जिसका अर्थ है बिना किसी ठोस या उचित कारण के जीवनसाथी को त्याग देना।

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