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वसुंधरा के मीड‍िया सलाहकार ट्रेन के टॉयलेट में एक घंटे फंसे रहे, बोले- बदबू से मौत हो जाती

राजस्‍थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के मीड‍िया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज ने बताया क‍ि ट्रेन के टॉयलेट में मोबाइल जरूर ले जायें, वरना कभी आप भी मेरी तरह एक बड़ी मुसीबत से रूबरू हो सकते हैं..!!

By लखन भारती

Feb 01, 2026 12:30 IST

राजस्‍थान की पूर्व मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे के मीड‍िया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज 30 जनवरी को ट्रेन के टॉयलेट में फंस गए. क‍िसी तरह रेलवे अध‍िकार‍ियों की मदद से टॉयलेट का गेट खुलवाकर बाहर न‍कले। उन्होंने सोशल मीडिया पर ल‍िखा- मैं शुक्रवार दिनांक 30 जनवरी, 2026 की शाम कोटा-श्रीगंगानगर ट्रेन 22981 में सवार होकर कोटा से जयपुर आ रहा था। सवाईमाधोपुर से थोड़ा आगे मैं ट्रेन के बाथरूम में आवश्यक सेवा के लिए गया। वापस बाथरूम से निकलने लगा तो डोर के अंदर लगी डोर लैच (कुंडी) फ्री हो गई। डोर खुल ही नहीं रहा था।

"बदबू के मारे दम घुटने लगा"

मैंने तमाम कोशिशें की, पर सारी असफल। बदबू के मारे दम घुटने लगा। मैं कई बार चिल्लाया भी, लेकिन किसी को मेरी आवज नहीं सुनाई दी। रेलवे के किसी अधिकारी के नंबर भी मेरे पास नहीं थे। फिर मैंने मेरे भाई (मामाजी के पुत्र) हरीश शर्मा और बेटे दिव्यांश को फोन लगाया, और उन्हें जानकारी दी। उन्होंने कहा आप रेलवे हेल्पलाइन पर फोन करो। हम भी करते हैं। उन्होंने और मैंने फोन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली..!!

"मैं धीरे-धीरे अवसाद की तरफ़ जा रहा था"

मैं धीरे-धीरे अवसाद की तरफ़ जा रहा था। ट्रेन में बाथरूम 2 फीट बाय 2 फीट से भी छोटा। मतलब इतना छोटा कि व्यक्ति अच्छे से हिल-डुल भी नहीं सके। थोड़ी देर में हरीश का फ़ोन आया। उसने कहा कि रेलवे के अधिकारियों को सूचित कर दिया है। अभी उनका टेक्नीशियन या इंजीनियर आ रहा है। थोड़ी देर में रेलवे के कर्मचारी आ गये। 10 मिनट तक उन्होंने भी कोशिश की पर नाकाम। उधर पुत्र दिव्यांश चिंता के कारण बार-बार फ़ोन कर रहा था। डोर खुला या नहीं पापा ?

रेलवे के कर्मचारियों ने कहा कि अब डोर तोड़ने के अलावा अन्य कोई उपाय नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया में यह परेशानी है कि डोर को तोड़े तो मेरे ऊपर डोर के गिरने की पूरी-पूरी संभावना। मैंने कहा तोड़ो वरना दम घुटने से मेरी मौत हो जाएगी।

"मैंने डोर पर दोनों हाथ लगा दिए"

मैंने डोर के दोनों हाथ लगा दिए, ज‍िससे मेरे हाथ डोर को थाम सके और वो मेरे सिर पर गिरे नहीं। इसके बाद डोर को बाहर की तरफ़ से अंदर की तरफ़ हथौड़े की मार से धकेला गया। थोड़ी देर में गेट टूट कर मेरे हाथों पर। थोड़ी से चोट तो आई पर मैं उस बदबूदार घुटन से बाहर आ गया। इस पूरे घटनाक्रम में 58 मिनट लगे। अब आप ख़ुद सोच सकते हैं कि यह 58 मिनट मेरे लिए कैसे रहें होंगें ?

परिवार रहा परेशान

घटना को लेकर आंवा के नवाचारों के लिए चर्चित युवा सरपंच जो कि महेंद्र भारद्धाज के पुत्र हैं। उन्हाेंने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि मेरे पास पापा का फोन आया। उन्होंने बताया कि में ट्रेन के बाथरूम में फंस गया हूं। मेरी चिंता बढ़ गई मेने रेलवे हेल्पलाइन पर प्रयास किया, बात नहीं बनी। अधिकारियों से बात की, तब जाकर लगभग एक घंटे बाद गेट का लोक तोड़कर मेरे पापा बाहर आये। इस दौरान मैंने कई बार पापा से मोबाईल पर बात की। रेलवे से कहना चाहूंगा मेंटिनेंस जरूरी है वह एक घंटा हमारे परिवार की चिंता का कारण बन गया।

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