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तेलंगाना अस्पताल में शव वाहन न मिलने पर बड़ा विवाद, परिजन ने शव कंधे पर ले गया

शव वाहन संकट से गुस्सा, तेलंगाना में प्रशासनिक लापरवाही पर जांच के आदेश

By प्रियंका महतो

May 25, 2026 19:28 IST

हैदराबाद : तेलंगाना के भद्राचलम में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी अस्पताल से शव वाहन उपलब्ध न होने का आरोप लगा है। इस कारण परिजन को मजबूरी में शव को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा।

मृतक का नाम कांदी वेंकन्ना (45) बताया गया है। जानकारी के अनुसार वह पिछले सप्ताह भीषण गर्मी के दौरान हीटस्ट्रोक से प्रभावित हो गए थे। इसके बाद परिवार के सदस्य उन्हें इलाज के लिए एक सरकारी अस्पताल में लेकर गए थे, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

आरोप है कि कांदी वेंकन्ना की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से शव ले जाने के लिए किसी भी प्रकार की शव वाहन सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई। सूत्रों के अनुसार, आपातकालीन स्थिति के लिए अस्पताल में शव वाहन मौजूद था, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया गया या वह उपलब्ध नहीं कराया गया।

स्थिति ऐसी बनी कि अस्पताल से कोई सहायता न मिलने पर परिवार के सदस्य और रिश्तेदार मजबूर होकर शव को कंधे पर उठाकर लगभग चार किलोमीटर पैदल चलकर घर तक ले गए। इस घटना को देखकर रास्ते में मौजूद लोग भी आक्रोशित हो गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

इस घटना को लेकर तेलंगाना में राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति को लेकर विपक्षी पार्टी बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने इस घटना पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस शासन में तेलंगाना की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।

वहीं बीआरएस नेता टी. हरीश राव ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि गरीब और असहाय परिवारों के लिए शुरू की गई आपातकालीन सेवाओं और शव वाहनों की व्यवस्था आज बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह घटना दिखाती है कि बीमारी और मृत्यु के समय पूरी तरह सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहने वाले लोगों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि इस पूरे मामले पर अब तक तेलंगाना की कांग्रेस सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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