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त्विषा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच और निष्पक्ष सुनवाई पर दिया बड़ा आदेश

जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने कहा—“मामले में किसी तरह का नैरेटिव नहीं बनना चाहिए”

नई दिल्ली : नयी दिल्ली में बियाह के कुछ ही महीनों बाद नोएडा की युवती त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।

सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचीली की पीठ द्वारा की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को पहले ही जिम्मेदारी सौंप दी है, इसलिए केंद्रीय जांच एजेंसी को तुरंत जांच का कार्यभार संभालना चाहिए।

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को मीडिया के सामने कोई भी बयान देने से बचना चाहिए और केवल जांच एजेंसी के समक्ष ही अपना पक्ष रखना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि मामले में शामिल सभी पक्षों को संयम बरतना होगा, ताकि किसी प्रकार की “कथानक (नैरेटिव)” न बने।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें विश्वास है कि मीडिया की वजह से इस मामले की जांच में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन हमें किसी प्रकार की कथानक बनाने से बचना चाहिए।”

घटना 12 मई की बताई जा रही है जब नोएडा में शादी के मात्र पांच महीने बाद त्विषा शर्मा अपने ससुराल में फांसी के फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। उनके पति समर्थ सिंह एक वकील हैं, जबकि उनकी सास एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।

मृतका के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। परिवार का यह भी आरोप है कि जांच में सास गिरिबाला सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी घटना के 10 दिन बाद हुई, जिस पर सोशल मीडिया में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा कि इस मामले को लेकर समाज में एक निश्चित “नैरेटिव” बन चुका है, जिसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया की देरी पर सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सीबीआई इस मामले की जांच करेगी और इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया आज ही शुरू कर दी जाएगी।

त्विषा के परिवार के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह ने कई टीवी चैनलों पर मृतका के निजी जीवन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं, जो सम्मानजनक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर तीन दिन की देरी से दर्ज की गई और जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं किए गए। इसके अलावा मृतका की सास द्वारा फोन कॉल डिटेल्स सार्वजनिक किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी महिला जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर भोपाल स्थित एम्स में दूसरी पोस्टमॉर्टम जांच भी कराई गई है।

वहीं आरोपी पक्ष के वकील सिद्धार्थ दवे ने मामले की मीडिया कवरेज पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए गोपनीय बयान को मीडिया में विस्तार से प्रकाशित किया गया है जो उचित नहीं है।

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