नई दिल्ली: राजधानी के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार और क्लब सदस्यों के बीच विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। क्लब के एक सदस्य विजय खुराना ने केंद्र सरकार द्वारा सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने 22 मई को जारी नोटिस के जरिए 1928 की स्थायी लीज की शर्तों का हवाला देकर क्लब परिसर खाली कराने का निर्देश दिया, लेकिन इसके पीछे किसी ठोस सार्वजनिक परियोजना या आवश्यकता का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। नोटिस में रक्षा अवसंरचना, सार्वजनिक सुरक्षा और शासन संबंधी ढांचे जैसे सामान्य कारणों का उल्लेख किया गया है।
मामले में सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के पीठ के समक्ष शीघ्र सुनवाई की मांग की। अदालत ने मामले को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित पैरवी कर सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने क्लब की जमीन, भवनों और अन्य संरचनाओं के बदले किसी प्रकार के मुआवजे का प्रस्ताव नहीं दिया है, जबकि क्लब और उसके सदस्यों के अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। क्लब पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई कानूनन प्रक्रिया अपनाए बिना प्रशासनिक दबाव और पुलिस शक्ति के सहारे जबरन बेदखली का प्रयास है।
क्लब सदस्यों का कहना है कि उन्हें 5 जून 2026 तक पूरा परिसर खाली करने को कहा गया है। हालांकि नोटिस में यह नहीं बताया गया कि क्लब ने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन किया है। याचिका के अनुसार 500 से अधिक सदस्य इस कानूनी चुनौती का समर्थन कर रहे हैं।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 300ए का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी संपत्ति के अधिकार को केवल एक कार्यकारी आदेश के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया, निष्पक्ष सुनवाई और उचित मुआवजा जरूरी है।
मामले में 18 दिसंबर 2009 के एक पुराने पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें भूमि एवं विकास कार्यालय ने पहले जारी पुनः प्रवेश आदेश वापस लेते हुए क्लब के स्वामित्व और अधिकार बहाल होने की बात कही थी। याचिका के अनुसार वर्षों तक किराया और अन्य शुल्क स्वीकार करना भी इस बात का संकेत है कि सरकार स्वयं क्लब के अधिकारों को मान्यता देती रही है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि 2020 में कंपनी अधिनियम की धाराओं 241 और 242 के तहत क्लब के प्रबंधन से जुड़े मामलों में नियुक्त प्रशासकों और निदेशकों के जरिए संस्था पर सरकारी प्रभाव बढ़ा। क्लब पक्ष का दावा है कि मौजूदा कार्रवाई उसी क्रम की अगली कड़ी है।
दिल्ली जिमखाना क्लब को देश के सबसे पुराने खेल और सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है। याचिका में कहा गया है कि क्लब पिछले करीब एक सदी से सफदरजंग रोड स्थित परिसर में संचालित हो रहा है और सदस्यों ने यहां खेल एवं मनोरंजन सुविधाओं के विकास पर वर्षों में भारी निवेश किया है।