हैदराबाद : तेलंगाना के नौकरशाहों और मीडिया के एक वर्ग के बीच अभूतपूर्व टकराव देखने को मिला है। हाल ही में राज्य के कुछ निजी न्यूज़ चैनलों के खिलाफ IAS और IPS ऑफिसर्स एसोसिएशन ने एफआईआर दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि एनटीवी, तेलुगु स्क्राइब, एमआर मीडिया तेलंगाना, प्राइम9 तेलंगाना, पीवी न्यूज़, सिग्नल टीवी, वोल्गा टाइम्स, मिरर टीवी ऑफिशियल और टी-न्यूज़ तेलुगु लगातार राज्य की महिला IAS अधिकारियों को लेकर अपमानजनक, अश्लील और निराधार खबरें दिखा रहे हैं।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि ये चैनल तुरंत फर्जी खबरें प्रसारित करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और टीवी व डिजिटल प्लेटफॉर्म से सारी सामग्री नहीं हटाते, तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
किन धाराओं में शिकायत दर्ज हुई?
इन दोनों संगठनों ने हैदराबाद पुलिस के पास टीवी चैनलों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 78 (स्टॉकिंग), 79 (महिला की शील भंग व निजता में हस्तक्षेप), 351(1) (आपराधिक धमकी) और 352 (शांति भंग) के तहत शिकायत दर्ज कराई है।
दो दिन पहले यानी शनिवार को IAS एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा था कि जो खबरें दिखाई जा रही हैं, वे सार्वजनिक सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए बेहद प्रतिगामी हैं और उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं। हम इस समय इन सभी कंटेंट को हटाने की मांग करते हैं।
बयान में कहा गया कि पत्रकारिता की आड़ में ये चैनल दरअसल चरित्र हनन कर रहे हैं। संवैधानिक पदों का अपमान और अधिकारियों का मनोबल गिराने की कोशिश होने पर संस्थागत स्तर पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
इतना कड़ा रुख क्यों?
आरोप है कि इन चैनलों ने राज्य के मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी और एक महिला IAS अधिकारी के बीच ‘अफेयर’ होने की सनसनीखेज खबरें प्रसारित कीं। इतना ही नहीं रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि इस रिश्ते का फायदा उठाकर कुछ महिला IAS अधिकारियों ने मंत्री की सिफारिश पर अपनी पसंद की पोस्टिंग मैनेज की।
इन खबरों के बाद सोशल मीडिया सहित कई जगहों पर अभद्र चर्चाएं शुरू हो गईं। इसके चलते पिछले शनिवार IAS एसोसिएशन और बाद में IPS व IFS एसोसिएशन ने भी कड़ा बयान जारी किया। जब इसका कोई असर नहीं हुआ, तो सोमवार को एफआईआर दर्ज कराई गई।
मंत्री वेंकट रेड्डी की प्रतिक्रिया क्या है?
वेंकट रेड्डी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि राजनीतिक नेता हमेशा निशाने पर रहते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिला IAS अधिकारियों और CMO को घसीटते हुए झूठी और आधारहीन खबरें दिखाई जाएं। किसी को भी उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस मामले पर उन्होंने राज्य के डीजीपी से विस्तार से चर्चा की है और पुलिस यह जांच कर रही है कि ऐसी अफवाहें और झूठी खबरें कैसे फैलाई गईं। रिपोर्ट आने के बाद वे इन मीडिया संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के तबादले पर अंतिम फैसला राज्य के मुख्यमंत्री का होता है यही परंपरा है। किसी भी अधिकारी की पोस्टिंग में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है।