पार्थ दत्त
'लेट्स फुटबॉल' नहीं, इस बार स्लोगन है 'लेट्स प्ले।' एक दिन बाद नए आईएसएल सीजन की शुरुआत होने जा रही है। तमाम आशंकाओं और खींचतान के बीच देश की नंबर एक फुटबॉल लीग इस बार पांच बड़े बदलावों के साथ आ रही है:-
1. इस बार पहली बार लीग का आयोजन देश की फुटबॉल संचालन संस्था एआईएफएफ कर रही है।
2. एफएसडीएल दौर में अधिकतम 13 टीमें खेलती थीं, इस बार रिकॉर्ड 14 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
3. किसी कॉर्पोरेट पार्टनर के बिना क्लबों के आर्थिक सहयोग से लीग का आयोजन हो रहा है, जो एक नया कदम है।
4. मोहन बागान और ईस्ट बंगाल को छोड़कर बाकी टीमों का बजट काफी कम हुआ है, जिससे भारतीय कोचों को ज्यादा मौका मिला है। पिछले सीजन पूरे साल सिर्फ खालिद जमील ही प्रमुख भारतीय कोच थे। इस बार चार भारतीय कोच नजर आएंगे—रेनेडी सिंह (बेंगलुरु), मेहराजुद्दीन (मोहम्मडन), क्लिफोर्ड मिरांडा (चेन्नईयिन) और टीजी पुरुषोत्तमन (ओडिशा)।
5. इसी कारण इस बार विदेशी खिलाड़ियों का दबदबा भी कम हो रहा है। मोहम्मडन के पास कोई विदेशी खिलाड़ी नहीं है, ओडिशा में सिर्फ एक विदेशी है। गोवा और बेंगलुरु में दो-दो विदेशी खिलाड़ी हैं। सिटी ग्रुप के हटने के बाद मजबूत मानी जाने वाली मुंबई एफसी में चार विदेशी जरूर हैं लेकिन जॉनी काउको और नूनो रेइस पहले जैसे प्रभावशाली नहीं रहे। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का बड़ा मौका है।
14 टीमों वाली इस लीग में हॉट फेवरिट के रूप में शनिवार को युवभारती में केरल ब्लास्टर्स के खिलाफ उतरेगी मौजूदा चैंपियन मोहन बागान सुपर जायंट। इस बार उनका बजट केरल, ओडिशा, मोहम्मडन, बेंगलुरु, नॉर्थईस्ट और चेन्नईयिन के संयुक्त बजट के बराबर है। तैयारी के मामले में भी सर्जियो लोबेरा की टीम के आसपास कोई क्लब नजर नहीं आता। ब्राजील के रॉब्सन और ऑस्ट्रेलियाई फॉरवर्ड दिमित्री शानदार फॉर्म में हैं। ईस्ट बंगाल की तैयारी भी लंबे समय से चल रही है लेकिन उनके विदेशी स्ट्राइकरों को टीम के साथ तालमेल बैठाने के लिए ज्यादा समय नहीं मिला है। नए विदेशी खिलाड़ियों पर ही गोल की जिम्मेदारी होगी। महेश सिंह चोट के कारण शुरुआत से उपलब्ध नहीं हैं, जो बड़ा झटका है। राहत की बात नंदकुमार की फॉर्म में वापसी है। ब्राजील के मिगुएल अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं पहुंचे हैं।
बिना स्पॉन्सर के मोहम्मडन की स्थिति सबसे कठिन है। आर्थिक संकट के साथ-साथ ट्रांसफर प्रतिबंध के कारण वे विदेशी खिलाड़ी भी नहीं ले पाए। हालांकि कोच मेहराजुद्दीन युवा खिलाड़ियों के साथ एक जुझारू टीम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कम अभ्यास के कारण फिटनेस समस्या बन सकती है लेकिन मजबूत टीमों के खिलाफ अभ्यास मैच खेलकर उनका मनोबल बढ़ा है। ईस्ट बंगाल के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में 10 खिलाड़ियों के साथ उन्होंने शानदार संघर्ष किया था। बुधवार को उन्होंने विदेशी सितारों से सजी डायमंड हार्बर को 2–1 से हराया। कम तैयारी की चुनौती ओडिशा, चेन्नईयिन और इंटर काशी को भी झेलनी होगी। आई लीग जीतकर इंटर काशी इस बार आईएसएल में नया चेहरा है। हैदराबाद एफसी अब स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के नाम से खेलेगी। 'लेट्स प्ले' का यह नारा इस बार भारतीय कोचों और खिलाड़ियों के लिए ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।