ज्यूरिखः समय के साथ फुटबॉल में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता गया है। VAR और गोललाइन तकनीक को FIFA पहले ही लागू कर चुका है। विश्वकप से लेकर प्रीमियर लीग और ला लीगा तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। अब FIFA फुटबॉल में तकनीक को और मजबूत बनाने की दिशा में काम शुरू कर चुका है। आने वाले विश्वकप के लिए सेमी-ऑटोमेटेड ऑफसाइड तकनीक को और उन्नत किया जा रहा है। इसके लिए 1248 फुटबॉल खिलाड़ियों का उपयोग किया जाएगा।
फिलहाल VAR तकनीक की मदद से रेफरी मैच के अहम पलों में फैसले लेते हैं। ऑफसाइड, गोल और फाउल जैसे फैसलों में VAR की सहायता ली जाती है जिससे निर्णय काफी हद तक सटीक होते हैं। लेकिन फिर भी इनमें कुछ खामियां रह जाती हैं। इस बार के विश्वकप में FIFA किसी भी तरह की गलती नहीं चाहता।
कैसे काम करेगा FIFA का यह सिस्टम?
विश्वकप में खेलने वाले हर खिलाड़ी का एक-एक 3D मॉडल तैयार किया जाएगा। यह मॉडल AI की मदद से बनाया जाएगा। हर खिलाड़ी की ऊंचाई और शारीरिक संरचना के अनुसार यह 3D मॉडल तैयार होगा। विश्वकप में 48 टीमों के 26-26 खिलाड़ी खेलेंगे यानी कुल 1248 खिलाड़ी। FIFA इन सभी खिलाड़ियों के 3D मॉडल बनाएगा।
इसके लिए हर खिलाड़ी को एक स्कैनिंग चेंबर में ले जाया जाएगा जहां वह खड़ा रहेगा और AI उसके शरीर को स्कैन करेगा। इस पूरे प्रोसेस की जिम्मेदारी Lenovo निभाएगा। FIFA ने बताया है कि इसके लिए खिलाड़ियों को अलग से कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी। विश्वकप से पहले होने वाले फोटोशूट के दौरान ही यह स्कैनिंग कर ली जाएगी।
इस तकनीक के जरिए VAR में खिलाड़ियों की मूवमेंट और भी ज्यादा वास्तविक दिखाई देगी, जिससे फैसले लेना और आसान हो जाएगा। इससे पहले FIFA ने इंटरकॉन्टिनेंटल कप में इस तकनीक का इस्तेमाल किया था। वहां सफलता मिलने के बाद ही इसे विश्वकप में लागू करने का फैसला लिया गया है।