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मोहनबागान ईस्टबेंगाल बने ‘मोहन बेगन’ और ‘ईस्ट बेगन’, केंद्रीय खेल मंत्री के भद्दे उच्चारण पर तीखी आलोचना

केंद्रीय मंत्री की गलत उच्चारण को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू।

By नवीन पाल, Posted by: रजनीश प्रसाद

Jan 07, 2026 15:45 IST

नई दिल्लीः आईएसएल (ISL) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक चर्चा आईएसएल के आयोजन को लेकर हो रही थी। उसका समाधान पूरी तरह निकल भी नहीं पाया था कि एक नया विवाद खड़ा हो गया। इस बार बहस के केंद्र में हैं केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया। आईएसएल को लेकर हुई बैठक के बाद पत्रकार सम्मेलन में वे मोहनबागान और ईस्टबेंगाल का नाम ठीक से नहीं बोल पाए। कम से कम सामने आए वीडियो में तो यही नजर आ रहा है। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप शुरू हो गए। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी भी इस पर तंज कसने से पीछे नहीं हटी।

आखिर मनसुख मांडविया ने क्या कहा?

मंगलवार को दिल्ली में आईएसएल के 14 क्लबों के प्रतिनिधियों, एआईएफएफ के अधिकारियों और केंद्रीय खेल मंत्री के बीच बैठक हुई। इस बैठक में यह तय हुआ कि आईएसएल 14 फरवरी से शुरू होगा। बैठक के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को संबोधित किया। इसी दौरान भाषण देते हुए मंत्री ने मोहनबागान का उच्चारण “मोहन बेगन” किया। इसके बाद ईस्टबेंगाल का नाम लेते समय उन्होंने कहा “ईस्ट बेगन”।

पत्रकार सम्मेलन का यह वीडियो क्लिप तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। बुधवार को इस घटना की निंदा करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने अपने एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट किया। पोस्ट में लिखा गया है कि नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के खेल मंत्री मनसुख मांडविया बंगाल के सौ साल से भी पुराने दो क्लबों के नाम ठीक से नहीं बोल पा रहे हैं। ये दोनों क्लब बंगाल की पहचान हैं। फुटबॉल बंगाल के खून में है हम फुटबॉल के साथ जीते हैं सांस लेते हैं लेकिन बाहरी लोग यह नहीं समझेंगे।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इस घटना की निंदा करते हुए एक्स पर लिखा है कि खेल मंत्री को ऐतिहासिक मोहनबागान और ईस्टबेंगाल क्लबों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह शर्मनाक है और इसी के सहारे बीजेपी बंगाल में जीतना चाहती है।

जहां तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे की कड़ी आलोचना की वहीं बीजेपी ने इसे सामान्य घटना बताया। बीजेपी नेता तरुणज्योति तिवारी ने इसे भाषाई अंतर का मामला करार दिया। उन्होंने एई समय ऑनलाइन से कहा कि पूर्वी भारत में उच्चारण का तरीका अलग होता है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ भी यही हुआ है। जैसे ‘सहवाग’ का उच्चारण बंगाल में एक तरह से होता है और दिल्ली में दूसरे तरह से। तृणमूल को इस पर राजनीति करने के बजाय बंगाल के खेल के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

बंगाल के दो प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लबों के नाम गलत उच्चारण किए जाने से यूनाइटेड स्पोर्ट्स के वरिष्ठ अधिकारी नवाब भट्टाचार्य स्वाभाविक रूप से निराश दिखे। उन्होंने पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि आजकल फुटबॉल चलाने के लिए फुटबॉल की जानकारी होना जरूरी नहीं राजनीति समझना जरूरी हो गया है। ईस्टबेंगल और मोहनबागान दोनों ही भारत की आजादी से जुड़े हुए क्लब हैं। लगता है मंत्री ने इन टीमों के नाम तक नहीं सुने हैं।

हालांकि जिस मंच पर यह घटना हुई वहां मौजूद एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने इस पूरे मामले से दूरी बनाए रखी है। उनसे संपर्क किए जाने पर उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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