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रसोई गैस की आपूर्ति में कमी को लेकर ममता बनर्जी केंद्र पर हमलावर

कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक निकला टीएमसी का विरोध मार्च। जमाखोरी रोकने और पैनिक बुकिंग कम करने के लिए निगरानी तेज।

By श्वेता सिंह

Mar 16, 2026 19:36 IST

कोलकाता: एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित कमी और आपूर्ति में बाधा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार की शाम कोलकाता में महारैली निकाली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं के साथ यह रैली कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक निकाली गयी। रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र की भाजपा सरकार पर अफरा-तफरी के हालात पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की वजह से आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

रैली धर्मतला में आकर खत्म हुई जहां तृणमूल कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा की वजह से देश में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि एलपीजी गैस सिलेंडर के मुद्दे पर उनकी सरकार सबसे पहले बैठक में शामिल हुई थी, लेकिन केंद्र की नीतियों के कारण आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ममता बनर्जी ने कहा, “लोग भाजपा द्वारा बनाई गई अनियोजित स्थिति के कारण परेशान हो रहे हैं। भाजपा ने यह स्थिति क्यों बनाई? यह कोई गुब्बारे की गैस नहीं है।” उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इसे संभाल रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एलपीजी गैस संकट और लगातार बढ़ रही महंगाई के खिलाफ आज सोमवार को सड़क पर उतर आयीं। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 2019 में मतुआ समाज को नागरिकता देने का वादा किया था। लेकिन सीएए मुद्दे के जरिए लोगों को गुमराह ही किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत वैध मतुआ मतदाताओं के मताधिकार का अधिकार छीन लिया। ममता बनर्जी ने कहा कि यह सरकार मतुआ विरोधी है, बंगाल विरोधी है। भाजपा के लिए मतुआ समुदाय के लोग सिर्फ वोट बैंक हैं।

गौरतलब है कि रविवार को ही चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनावों की तिथियों की घोषणा की थी। इसके बाद आधी रात को अचानक ममता बनर्जी सरकार के कई शीर्ष अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया गया। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव को ही नहीं, पुलिस के आला अधिकारी- डीजीपी, एडीजी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को भी पद से हटा दिया। इससे पहले टीएमसी सांसदों ने सोमवार सुबह संसद में हंगामा किया। राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों को हटाने के चुनाव आयोग के फैसले पर तृणमूल कांग्रेस ने आज राज्यसभा में विरोध जताया और दिन भर के लिए सदन से वाकआउट किया।

इधर केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, हालांकि एलपीजी आपूर्ति को लेकर कुछ चिंता जरूर बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि देशभर में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी सरकार के कई शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है। सबसे पहले राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटाकर उनकी जगह दुष्यंत नरियाला को नियुक्त किया गया। इसके साथ ही गृह सचिव जगदीश मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया। चुनाव आयोग ने राज्य के डीजीपी पीयूष पांडे को भी पद से हटा दिया। कानून व्यवस्था के एडीजी विनीत गोयल को भी तत्काल प्रभाव से हटाया गया। वहीं कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार को भी पद से हटा दिया। चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों की नियुक्त की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग का कहना है कि यह कदम विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। इधर, तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के इन मनमाने फैसलों के खिलाफ ही संसद से सड़क तक विरोध जताया।

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