नयी दिल्लीः बुधवार की सुबह घड़ी में समय था 10 बजकर 6 मिनट। सुप्रीम कोर्ट के वीवीआईपी गेट से सबसे पहले दिल्ली पुलिस की एस्कॉर्ट वैन दाखिल हुई, उसके पीछे सफ़ेद गाड़ियों का काफ़िला। देखते ही देखते भीड़ उमड़ पड़ी। तब तक दिल्ली पुलिस की विशेष प्रशिक्षित टुकड़ी ममता बनर्जी को एस्कॉर्ट करते हुए लिफ़्ट तक पहुँचा चुकी थी। इसके बाद दूसरी मंज़िल पर लिफ़्ट से उतरकर वे सुप्रीम कोर्ट के गलियारे से होते हुए मुख्य न्यायाधीश की अदालत की ओर बढ़ीं। साधारण साड़ी, गले में काला उत्तरीय। गलियारे में दो मिनट की पैदल दूरी तय कर जैसे ही वे मुख्य न्यायाधीश की अदालत के प्रवेश द्वार पर पहुँचीं, वहाँ ज़बरदस्त अफ़रा-तफ़री मच गई। हर कोई मुख्यमंत्री की एक झलक और तस्वीर लेना चाहता था।
भीड़ को संभालने में दिल्ली पुलिस के जवानों और सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को चुनौती देकर उन्होंने न सिर्फ़ एक मिसाल क़ायम की, बल्कि देश की पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बनीं, जो अपने ही दायर मामले में सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होकर ख़ुद दलील दे रही थीं। इससे पहले देश ने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा था। ठीक 10-12 मिनट के भीतर मुख्यमंत्री जाकर मुख्य न्यायाधीश की अदालत के अंतिम छोर पर विज़िटर्स बेंच पर बैठ गईं। उनकी गोद में मामले से जुड़ी एक फ़ाइल और अपना मोबाइल था। दिल्ली पुलिस के अलावा उनके साथ उनके दो निजी सुरक्षा अधिकारी, राज्य के डायरेक्टर (सिक्योरिटी) मनोज वर्मा और राज्य के वकील मौजूद थे। तृणमूल के वकील-सांसद कल्याण बंद्योपाध्याय और सुखेंदुशेखर राय भी वहाँ थे।
एक बार मुख्य न्यायाधीश की अदालत से निकलकर जब वे बार एसोसिएशन कक्ष की ओर जा रही थीं, तभी उनकी मुलाक़ात देश के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटारमानी से हुई। मुख्यमंत्री ने उन्हें नमस्कार करते हुए पूछा, “सर, आपकी तबीयत कैसी है?” अटॉर्नी जनरल ने भी सौजन्यपूर्वक उत्तर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में इस दिन मामले की सुनवाई के लिए लंच टाइम भी आगे बढ़ा दिया गया। सुनवाई शुरू होने से पहले मुख्य न्यायाधीश की अनुमति लेकर अपनी दलील रखने से पूर्व ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में मौजूद सभी लोगों का नाम लेकर अभिवादन किया, यहाँ तक कि अपने विपक्ष में खड़े आयोग के वकील राकेश द्विवेदी जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं का भी। इसके बाद भावनाओं और तर्क दोनों के मेल से लगभग पंद्रह मिनट तक उन्होंने अपनी दलील रखी।
कई क़ानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री की इस दलील के लिए शायद आयोग के वकील राकेश द्विवेदी और केंद्र के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उतनी तैयारी के साथ नहीं आए थे। इसी कारण स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर हुई इस हाई-प्रोफ़ाइल सुनवाई में वे कुछ हद तक फीके नज़र आए। सुनवाई समाप्त होने के बाद अदालत कक्ष से निकलने से पहले मुख्यमंत्री ने सबको नमस्कार किया। दोपहर करीब 1:45 बजे वे सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हुईं।
बंगाल की मांगों को उठाने, केंद्र के भाजपा-विरोधी गठबंधन की बैठकों या तृणमूल सांसदों के साथ चर्चाओं के लिए ममता बनर्जी पिछले कुछ वर्षों में कई बार दिल्ली आई हैं लेकिन इस बार की यात्रा को सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलील के कारण बिल्कुल अलग ही आयाम मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल नेता के इस अभूतपूर्व कदम से राष्ट्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, डीएमके और शिवसेना (उद्धव गुट) जैसे विपक्षी दलों का समर्थन भी तृणमूल के पक्ष में आ सकता है। बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ‘SIR’ मुद्दे पर माहौल बनाने के साथ-साथ आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में तृणमूल की भूमिका क्या होगी, इस पर सबकी नज़र है।
इस दिन सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री की दलील के बाद शिवसेना (उद्धव) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तृणमूल के समर्थन में कहा, “पश्चिम बंगाल और अन्य चुनावी राज्यों में एकतरफ़ा तरीक़े से SIR प्रक्रिया चलाई जा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया, “ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की तरह चुनाव आयोग को भी भाजपा उसी ढंग से इस्तेमाल कर रही है।” सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा, “भाजपा के काले कारनामों के ख़िलाफ़ ही ममता बनर्जी ने काला कोट पहना है।” उन्होंने जोड़ा, “वोट न दे पाने का मतलब अपने अधिकार खो देना है। इसी तरह एक-एक कर सब कुछ छीना जाएगा। हम ममता बनर्जी के साथ हैं।” ‘SIR’ के माहौल में इस तरह विपक्षी दलों का साथ मिलना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तृणमूल सांसद महुआ मैत्रा के शब्दों में, “पहली बार कोई मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट आकर ख़ुद दलील दे रही हैं। इससे आयोग डर गया है।”
हालाँकि भाजपा का दावा है कि इस सुनवाई से तृणमूल को कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। सुनवाई समाप्त होने के लगभग डेढ़ घंटे के भीतर दिल्ली में भाजपा के राज्य अध्यक्ष व सांसद शमिक भट्टाचार्य और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। शमिक ने कहा, “ममता बनर्जी की दलील से आख़िरकार कोई फ़ायदा नहीं होगा। तृणमूल बंगाल की मतदाता सूची में घुसपैठियों को बनाए रखना चाहती है,लेकिन वह इसमें सफल नहीं होगी।” सुकांत ने तंज कसते हुए कहा, “बंगाल के सुपरस्टार उत्तम कुमार ने सिर्फ़ एक हिंदी फ़िल्म की थी-‘छोटी सी मुलाक़ात’। वह फ़िल्म फ्लॉप हुई थी। ममता बनर्जी की यह दिल्ली यात्रा भी फ्लॉप होगी।”
राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री का रवैया भी क़ानूनी जगत के एक वर्ग को काफ़ी प्रशंसनीय लगा। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड शुभाशीष भौमिक ने कहा, “इस दिन मुख्यमंत्री ने बिल्कुल पेशेवर वकीलों की तरह दलील दी। शुरुआत से ही वे अपने तर्कों के बिंदुओं पर पूरी तरह केंद्रित रहीं और पूरी सुनवाई के दौरान कभी उस दायरे से बाहर नहीं गईं।” वहीं तृणमूल के वकील-सांसद कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा, “बंगाल के आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई आज मुख्यमंत्री ने देश की सर्वोच्च अदालत में खड़े होकर लड़ी है। उनके साथ खड़े होकर इस लड़ाई को देखना मेरे लिए भी गर्व की बात है।”