नयी दिल्ली/कोलकाताः पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया लागू किए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत के चुनाव आयोग के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। इस मामले की सुनवाई बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच के सामने ममता बनर्जी स्वयं उपस्थित रह सकती हैं। हालांकि इस विषय पर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा शाखा की ओर से उनकी उपस्थिति की अनुमति दे दी गई है। ममता बनर्जी को ‘Z प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा विंग की विशेष मंज़ूरी आवश्यक होती है। बताया गया है कि यह मामला बुधवार को अदालत में सूचीबद्ध हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की कंप्यूटरीकृत सूची में 4 फ़रवरी को यह मामला “ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग” शीर्षक से दर्ज दिख रहा है, जबकि दो दिन पहले यह 6 फ़रवरी की सूची में दर्शाया गया था।
गौरतलब है कि 28 जनवरी को ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनका आरोप है कि जिस तरीके से यह प्रक्रिया लागू की जा रही है, वह राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण है और इससे चुनाव आयोग की कथित तानाशाही मानसिकता झलकती है। सोमवार को मुख्यमंत्री दिल्ली गई थीं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित चुनाव आयोग के पूर्ण पीठ से मिलने वाली थीं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया जिसकी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया। हालांकि चुनाव आयोग के एक सूत्र ने मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
फिलहाल ममता बनर्जी दिल्ली में ही मौजूद हैं और इस हाई-प्रोफाइल मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पहले भी कई बार मुख्यमंत्री यह कह चुकी हैं कि वह सिर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक वकील भी हैं। ऐसे में यदि बुधवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आता है तो क्या वह केवल उपस्थित रहेंगी या स्वयं पक्ष भी रखेंगी-इसे लेकर राज्य और देश की राजधानी, दोनों जगह अटकलें लगाई जा रही हैं।