नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने न केवल व्यापार जगत में हलचल मचा दी है, बल्कि राजनीतिक विमर्श को भी नया आयाम दिया है। इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 18% तक घटाया गया, जबकि अमेरिका का दावा है कि इसे लेकर वह अपने कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकेगा।
लेकिन विपक्ष, खासकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस समझौते को लेकर स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि केवल ट्रंप और मोदी के ट्वीट्स से समझौते की जानकारी पर्याप्त नहीं है। थरूर ने सवाल उठाया कि समझौते के तहत किसानों और भारतीय उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या भारत को अपने अन्य आयातों को समायोजित करना होगा। इसकी पूरी जानकारी मिलनी चाहिए तभी जश्न मनाया जा सकता है।
समझौते के संभावित आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव
विश्लेषकों का कहना है कि 18% टैरिफ कटौती से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी बाजार में बढ़ सकती है। वहीं, कृषि क्षेत्र के खुलने और टैरिफ को शून्य करने जैसी शर्तें भारतीय किसानों और घरेलू व्यापारियों के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह भारतीय बाजार को अमेरिका के लिए पूरी तरह खोलने जैसा प्रतीत होता है, जिससे स्थानीय उद्योग और किसानों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई थी। हालांकि भारत में इसे मोदी के अनुरोध पर बताया गया। विपक्ष का तर्क है कि यह संसदीय लोकतंत्र में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करता और सरकार को सदन में विवरण पेश करना चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजसभा में कहा कि सरकार स्वतः संज्ञान लेकर बयान जारी करेगी और सदन में इस पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष के विरोध को “असामयिक और लोकतंत्र के लिए खतरा” करार दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि व्यापारिक लाभ और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन खोजना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। यदि समझौते के फायदे पूरी तरह स्पष्ट न किए गए तो यह किसानों, व्यापारियों और विपक्ष के बीच संदेह और विरोध को और बढ़ा सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में छोटे-छोटे फायदे नजर आते हैं, जैसे कि टैरिफ कटौती और अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ाना। लेकिन खुले सवाल और संपूर्ण विवरण का अभाव इसे अनिश्चित और विवादास्पद बनाता है। संसद में सुवो मोटु बयान और खुली चर्चा से ही इस व्यापार समझौते का असली प्रभाव सामने आएगा।