🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर तृणमूल भी करेगी हस्ताक्षर, भाजपा ने जारी किया व्हिप; बजट सत्र में बढ़ सकता है टकराव

अब तक 118 सांसद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। अब तृणमूल कांग्रेस (के सांसद भी इसमें हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि लोकसभा में भाजपा के पास बहुमत है।

नयी दिल्लीः बजट सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं। उनके खिलाफ हटाने के प्रस्ताव (मोशन फॉर रिमूवल) का नोटिस भी विपक्ष ने पेश किया है।

सूत्रों के अनुसार, अब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के निर्देश पर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर करेंगे। इस प्रस्ताव पर आगामी सोमवार को मतदान होने की संभावना है।

सोमवार से बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। इसके मद्देनज़र पहले तीन दिनों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी किया है। राजनीतिक हलकों का एक वर्ग मानता है कि दूसरे चरण की शुरुआत में ही सरकार इस मुद्दे पर चर्चा और मतदान करा सकती है।

गौरतलब है कि बजट सत्र के पहले चरण में ही विपक्ष ने ओम बिरला को हटाने की मांग करते हुए नोटिस दिया था। उस समय तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

इस बारे में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि तृणमूल लोगों को सुधार का अवसर देने में विश्वास करती है। उन्होंने कहा, “अगर आप गलती करते हैं तो आपको मौका देना चाहिए। नहीं तो भाजपा और हमारे बीच क्या फर्क रह जाएगा? उपराष्ट्रपति ने बात नहीं सुनी तो उन्हें तुरंत हटा दिया गया। हम उनके जैसे नहीं हैं।”

संसदीय नियमों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए निश्चित संख्या में सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस पर अब तक 118 सांसद हस्ताक्षर कर चुके हैं। अब तृणमूल सांसद भी इसमें हस्ताक्षर करेंगे।

हालांकि लोकसभा में केंद्र सरकार के पास बहुमत होने के कारण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष को इस प्रस्ताव में ज्यादा सफलता नहीं मिलेगी। बहुमत के आधार पर प्रस्ताव के खारिज होने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।

इसके बावजूद माना जा रहा है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर (1954), हुकम सिंह (1966) और बलराम जाखड़ (1987)के खिलाफ भी ‘मोशन फॉर रिमूवल’ लाया गया था, लेकिन तीनों ही बार यह प्रस्ताव खारिज हो गया था।

Prev Article
युद्ध के कारण बदला उड़ान मार्ग, एक फ्लाइट पर अतिरिक्त खर्च 50 लाख रुपये!

Articles you may like: