नई दिल्ली : घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद आम लोगों में चिंता बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि महंगाई के बीच घर का बजट संभालना अब और कठिन हो जाएगा। दिल्ली की निवासी अनीता ने ANI से बातचीत में कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण राजधानी में रहना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा सिलेंडर एक महीने नहीं चलता… गरीब लोगों को बहुत परेशानी होती है… हमें महीने में दो सिलेंडर इस्तेमाल करने पड़ते हैं।”
एक अन्य महिला ने आशंका जताई कि एलपीजी के दाम बढ़ने के बाद पेट्रोल और डीजल भी महंगे हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी लोगों ने कीमत बढ़ने पर नाराजगी जताई।
“हरदीप पुरी की किसी बात पर भरोसा मत करो”: पवन खेड़ा
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तीखा हमला किया है। पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि एक दिन पहले सरकार सस्ते ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कर रही थी, लेकिन अगले ही दिन गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ा दी गईं।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “कल हरदीप पुरी ने कहा था कि नागरिकों के लिए किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। आज घरेलू एलपीजी 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर 115 रुपये महंगे हो गए। हरदीप सिंह पुरी की किसी बात पर भरोसा मत करो।”
रूसी तेल खरीदने की ‘अनुमति’ पर जयराम रमेश ने केंद्र पर साघा निशाना
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उस बयान को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है जिसमें अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने भारत को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है। जयराम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बयान दिखाता है कि सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों का पालन कर रही है। फॉक्स बिजनेस को दिए गए इंटरव्यू का हवाला देते हुए रमेश ने X पर लिखा, “अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने मोदी सरकार को राष्ट्रपति ट्रंप के आदेशों का पालन करने का प्रमाणपत्र दे दिया है। इससे साफ हो गया कि खुद को 56 इंच का सीना बताने वाला नेतृत्व कितना कमजोर और समझौता करने वाला हो गया है।”
स्कॉट बेसेंट ने अपने इंटरव्यू में कहा कि भारत ने पहले प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना कम किया था और उसकी जगह अमेरिकी तेल लेने की योजना थी। हालांकि वैश्विक आपूर्ति में अस्थायी अंतर को देखते हुए भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल लेने की अनुमति दी गई है।
खाड़ी क्षेत्र में जारी संकट के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। इसी कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश वैकल्पिक व्यवस्थाएं तलाश रहे हैं। भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। विपक्षी दलों ने अमेरिका के इस बयान को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ी आलोचना की है।