पटनाः बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार, 8 मार्च को जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता लेने जा रहे हैं। जदयू ने इसकी पुष्टि कर दी है। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वर्षों तक नीतीश कुमार ने परिवारवाद की राजनीति का विरोध किया था, जबकि अब उनके इकलौते बेटे का सक्रिय राजनीति में प्रवेश तय हो गया है।
इस घटनाक्रम का समय भी खास है। नीतीश कुमार ने 5 मार्च को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसे उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के एक नए चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली की राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ने के साथ ही बिहार में पार्टी के भविष्य को लेकर जदयू नेतृत्व नई रणनीति बना रहा है।
पार्टी बैठक में उठा प्रस्ताव
जदयू नेता नीरज कुमार के मुताबिक मुख्यमंत्री आवास पर हुई पार्टी नेताओं की बैठक में केंद्रीय मंत्री और सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा सांसद संजय झा ने निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने का सुझाव दिया। पार्टी नेताओं ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और निशांत कुमार ने भी इसे स्वीकार कर लिया।
नीरज कुमार ने बताया कि निशांत कुमार रविवार को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता लेंगे और इसके बाद राज्य के विभिन्न इलाकों का राजनीतिक दौरा भी कर सकते हैं। हालांकि पार्टी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी भूमिका क्या होगी।
उत्तराधिकार की राजनीति पर चर्चा
जदयू नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार की एंट्री पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए “होली का तोहफा” है। मंत्री अशोक चौधरी और श्रवण कुमार जैसे नेताओं ने कहा कि लंबे समय से कार्यकर्ताओं के बीच यह मांग उठती रही थी कि पार्टी के भीतर एक ऐसा चेहरा सामने आए जो भविष्य में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल सके।
दरअसल, नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे हैं। उन्होंने कई बार परिवारवाद के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद यादव की राजनीति की आलोचना की थी। ऐसे में निशांत कुमार की एंट्री को एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
संभावित भूमिका को लेकर अटकलें
निशांत कुमार अब तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे हैं और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वे बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा के छात्र रहे हैं और लंबे समय तक लो-प्रोफाइल जीवन जीते रहे। उन्होंने पहले राजनीति में दिलचस्पी नहीं होने की बात भी कही थी।
हालांकि अब राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि नई एनडीए सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री की भूमिका दी जा सकती है या फिर जदयू संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, ताकि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद पार्टी में नेतृत्व का खालीपन न पैदा हो।
नीतीश कुमार का संदेश
राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं और मंत्रियों को भरोसा दिलाया कि वे बिहार से पूरी तरह दूर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वे पटना में भी रहेंगे और राज्य के विकास से जुड़े कामों पर नजर बनाए रखेंगे।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से बिहार के विकास के लिए मेहनत जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि वे नई सरकार और पार्टी को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे।
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने 2025 में एनडीए की दो-तिहाई बहुमत की जीत के बाद दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। ऐसे में उनके बेटे की राजनीति में एंट्री को जदयू के संभावित “पोस्ट-नीतीश युग” की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।