कोच्चि : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को केरल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कई नई व्यवस्थाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस बार मतदाताओं को मतदान केंद्र के गेट तक मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति होगी। साथ ही ईवीएम पर पहली बार उम्मीदवारों की रंगीन फोटो दिखाई जाएगी ताकि मतदाता बिना किसी भ्रम के अपने पसंदीदा उम्मीदवार को चुन सकें।
दो दिनों तक चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद कोच्चि में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि डाक मतपत्रों की गिनती ईवीएम से दो राउंड पहले की जाएगी। यदि फॉर्म 17सी और ईवीएम के आंकड़ों में किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है तो उस स्थिति में वीवीपैट पर्चियों की गिनती अनिवार्य रूप से की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मतदाता सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग कई नए कदम उठा रहा है। मतदान के दिन प्रिसाइडिंग ऑफिसर हर दो घंटे में मतदाता उपस्थिति का आंकड़ा सीधे ईसीआईएनईटी ऐप पर अपलोड करेंगे। इससे मतदान की जानकारी समय पर उपलब्ध होगी।
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि चुनाव आयोग ने राज्य के चुनावी तंत्र और सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत बैठकें की हैं। आयोग ने युवाओं और मतदाता जागरूकता से जुड़े लोगों से भी बातचीत की। उन्होंने बूथ स्तर के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केरल के लिए कोई नई बात नहीं है। केरल ने देश और दुनिया को लोकतंत्र की कई सीख दी है। वर्ष 1960 में राज्य में पहली बार आचार संहिता बनाई गई थी जिसे बाद में चुनाव आयोग ने सभी दलों से चर्चा के बाद अपनाया।
चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। किसी भी बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे। राज्य में 397 महिला प्रबंधित मतदान केंद्र और 790 मॉडल मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
राज्य में 2.43 लाख दिव्यांग मतदाता और 85 वर्ष से अधिक आयु के दो लाख से ज्यादा वरिष्ठ नागरिक हैं। इन्हें घर से मतदान करने का विकल्प दिया जाएगा। राज्य में 100 वर्ष से अधिक आयु के 1571 मतदाता भी हैं। युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए कॉलेजों में अभियान चलाने हेतु 138 विशेष अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों से भी सुझाव लिए हैं। कई दलों ने चुनाव तिथियां तय करते समय स्थानीय त्योहारों का ध्यान रखने की अपील की है।