नयी दिल्लीः लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौता आखिरकार अंतिम रूप ले चुका है। सोमवार रात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। इसके बाद उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की। इस पर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है। एनडीए खेमे खास तौर पर भाजपा, इसे ‘विन–विन सिचुएशन’ के रूप में देख रही है। वहीं कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा है कि मोदी ने ट्रंप के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कहा, ‘मोगैम्बो खुश हुआ।’
समझौते के अंतिम होने की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने टैरिफ घटाने की बात बताते हुए X पर पोस्ट किया। यहीं कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री को अपनी ही सरकार की कोई जानकारी नहीं है। उन्हें ये खबर ट्रंप या उनके नियुक्त अधिकारियों से मिल रही है।’ उन्होंने इसे ‘ट्रंप-निर्भरता’ बताते हुए तंज कसा।
पिछले महीने नई दिल्ली ने यूरोपीय संघ के साथ एक समझौता किया था, जिसे दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा था। उसी संदर्भ को उठाते हुए जयराम ने कहा, ‘इसे किसी भी तरह सभी समझौतों की जननी नहीं कहा जा सकता।’ साथ ही उन्होंने दावा किया, ‘मोदी पर जो दबाव है, वह आज पानी की तरह साफ है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि प्रधानमंत्री ट्रंप के साथ एक मंच पर खड़े होने में भी असहज महसूस कर रहे हैं। गले मिलना तो दूर की बात है।’
इसके बाद जयराम ने 80 के दशक की लोकप्रिय हिंदी फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर संवाद का ज़िक्र करते हुए लिखा, ‘वॉशिंगटन में मोगैम्बो खुश हुआ-यह साफ है।’ उन्होंने यह भी दावा किया कि मोदी ने आखिरकार ट्रंप के सामने नत-मस्तक हो गए हैं।
हालांकि भाजपा इस बात में नहीं पड़ रही कि समझौते की घोषणा पहले किसने की। वह इसे पूरी तरह जीत के रूप में देख रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने X पर लिखा, ‘भारत–अमेरिका संबंधों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। इससे व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे और आपसी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।’ उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘इस समझौते से आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को नई गति मिलेगी।’
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस समझौते को ‘विन–विन’ बताया। उन्होंने लिखा, ‘भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक हैं। इस समझौते से दोनों देशों के कारोबारी ही नहीं, बल्कि आम जनता भी लाभान्वित होगी।’