नयी दिल्लीः सोमवार को भारत में जब रात हो चुकी थी, उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वह दिल्ली को टैरिफ के दबाव से राहत दे रहे हैं। पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से ट्रंप को धन्यवाद दिया।
अब सवाल उठ रहा है-क्या एक फोन कॉल में ही टैरिफ विवाद सुलझ गया? मोदी-ट्रंप की ‘ब्रोमैन्स’ को लेकर दुनिया भर में चर्चा होती रही है। लेकिन ‘दोस्त’ देश रूस से भारत द्वारा खनिज तेल खरीदे जाने की बात ट्रंप को कथित तौर पर स्वीकार नहीं थी। इसके बाद ही भारत पर टैरिफ का बोझ डाला गया। दूसरी ओर तेल खरीद को लेकर किसी को खुश करने या ‘तैलमर्दन’ की नीति पर दिल्ली किसी भी हाल में नहीं चलेगा-यह बात कई बार साफ कर दी गई थी। इसके उलट अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच ही नई दिल्ली ने यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह बात ट्रंप को बिल्कुल रास नहीं आई। ट्रंप के करीबी नेताओं की ओर से कई बयान आए और नाराज़गी जाहिर की गई।
स्थिति ने 2 फरवरी को नया मोड़ लिया। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि ट्रंप और मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई है। इसके साथ ही उन्होंने एक पंक्ति और जोड़ी—‘नज़र बनाए रखें’। इस घोषणा के एक घंटे के भीतर ही ट्रंप ने भारत पर टैरिफ कम करने का ऐलान कर दिया। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। ट्रंप के मुताबिक इसके जवाब में साउथ ब्लॉक भी अमेरिकी उत्पादों पर सभी शुल्क बाधाएं हटाकर उसे ‘शून्य’ प्रतिशत पर ले आएगा। यानी ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को तो हटाया ही गया, साथ ही पहले से लागू रेसिप्रोकल टैरिफ में भी 7 प्रतिशत की कटौती हुई।
ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने ट्रंप का आभार जताया। मोदी ने लिखा, “मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आज बात करके बहुत अच्छा लगा। उन्होंने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। 140 करोड़ लोगों की ओर से मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।”
उन्होंने आगे लिखा, “जब दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियां और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं तो लोगों को लाभ होता है। इससे दोनों पक्षों के लिए असीम अवसर पैदा होते हैं। विश्व की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए ट्रंप के नेतृत्व की आवश्यकता है। मैं उनके साथ और अधिक गहराई से काम कर द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता हूं।”
एक ओर जहां मोदी ट्रंप की तारीफों के पुल बांध रहे हैं, वहीं इस फैसले को लेकर विपक्ष मुखर हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मुद्दे पर नई दिल्ली की बजाय औपचारिक घोषणा वॉशिंगटन की ओर से क्यों आई। साथ ही उन्होंने ‘ट्रंप निर्भरता’ के मुद्दे को भी रेखांकित किया।