नयी दिल्लीः लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य और 2027 में होने वाले कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी में जुटी दिखाई दे रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। संगठनात्मक स्तर पर यह बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यकाल का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।
हाल ही में कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी जगह बी.के. हरिप्रसाद को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद अब देशभर में संगठनात्मक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के बीच महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है।
चुनावी राज्यों पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस का पूरा ध्यान उन राज्यों पर केंद्रित है जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं। इसके अलावा वर्ष के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होंगे।
इनमें पंजाब को छोड़कर अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से है। वहीं हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता बचाने की चुनौती का सामना करेगी।
पंजाब में नए समीकरण तलाश रही पार्टी
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा सबसे अधिक है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजा बराड़ और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा दोनों जाट सिख समुदाय से आते हैं। ऐसे में सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला इस पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उन्हें पंजाब में कांग्रेस का प्रमुख हिंदू चेहरा माना जाता है। दूसरी ओर, दलित मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी का एक वर्ग पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नाम की भी पैरवी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में दलित नेतृत्व पर दांव की तैयारी
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन में बदलाव की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा तीनों सवर्ण वर्ग से आते हैं।
कांग्रेस नेतृत्व राज्य में दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि प्रदेश प्रभारी या प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी दलित नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
गोवा, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी बदलाव संभव
गोवा कांग्रेस में हाल ही में गिरीश चोडनकर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह पहले तमिलनाडु और पुडुचेरी के प्रभारी थे। ऐसे में इन दोनों राज्यों के लिए नए प्रभारी की नियुक्ति आवश्यक हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि गोवा संगठन में भी कुछ अतिरिक्त बदलाव किए जा सकते हैं ताकि चुनावी तैयारियों को और मजबूत किया जा सके।
बंगाल, असम और केरल में भी संगठनात्मक हलचल
हाल ही में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में भी कांग्रेस बदलाव के मूड में दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल में पार्टी प्रभारी गुलाम अहमद मीर की जिम्मेदारी बदले जाने की चर्चा है। वहीं असम विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद प्रभारी जितेंद्र सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया है।
केरल में भी बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ राज्य सरकार में मंत्री बन चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्नीथला भी केरल सरकार में मंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में केरल को नया प्रदेश अध्यक्ष और महाराष्ट्र को नया प्रभारी मिल सकता है।
बिहार और राजस्थान पर भी नजर
पिछले विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बिहार कांग्रेस में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए नेतृत्व में बदलाव पर विचार कर रही है।
राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी संभावित फेरबदल की सूची में बताया जा रहा है। वहीं दिल्ली के प्रभारी काजी निजामुद्दीन उत्तराखंड से विधायक हैं, इसलिए पार्टी उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्त कर सकती है।
कई वरिष्ठ नेताओं को मिल सकती है नई भूमिका
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ की जगह किसी बड़े राज्य की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसी तरह गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक को किसी अन्य राज्य में भेजे जाने की चर्चा है।
हिमाचल प्रदेश की प्रभारी रजनी पाटिल और आंध्र प्रदेश के प्रभारी मणिकम टैगोर को भी नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रियंका गांधी की भूमिका पर भी नजर
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस नेतृत्व प्रियंका गांधी वाड्रा को संगठन में अधिक सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका दे सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन आगामी चुनावों को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व स्तर पर नई जिम्मेदारियों के वितरण की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में संगठन को चुनावी जरूरतों और सामाजिक समीकरणों के अनुरूप ढालने के लिए बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व कब और किन राज्यों में नए चेहरों की घोषणा करता है। यह फेरबदल केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाला कदम भी साबित हो सकता है।