खाने को लेकर नखरे करना छोटे बच्चों में बहुत सामान्य समस्या है। कई बार वे नया खाना खाने से मना कर देते हैं। कभी-कभी वे सिर्फ अपनी पसंद के कुछ ही खाद्य पदार्थों तक सीमित रहते हैं। लेकिन सही पोषण न मिलने पर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। इसलिए जबरदस्ती करने के बजाय समझदारी से आदत विकसित करना ही सबसे प्रभावी तरीका है।
स्वस्थ खान-पान की आदत कैसे विकसित करें?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बच्चों का स्वाद और पसंद बड़ों से अलग होता है। यदि वे कोई नया भोजन एक बार में न खाएं तो निराश न हों। उसी भोजन को अलग तरीके से, आकर्षक ढंग से सजाकर कई बार परोसें। जैसे—अगर बच्चा सब्जी नहीं खाता, तो रंग-बिरंगी सब्जियों से पास्ता, सैंडविच या पराठा बनाकर दे सकते हैं। खाने का रंग, आकार और परोसने का तरीका बच्चे की रुचि बढ़ाता है।
दूसरे, बच्चे को खाना बनाने के छोटे-छोटे कामों में शामिल करें। सब्जी धोना, सलाद मिलाना या प्लेट सजाने की जिम्मेदारी देने से वे अपने बनाए भोजन को खाने में अधिक रुचि दिखाते हैं। इससे भोजन के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव बनता है।
तीसरे, टीवी या मोबाइल के सामने खाना खिलाने की आदत बंद करें। इससे बच्चे का ध्यान खाने पर नहीं रहता और उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि वे कितना खा रहे हैं। यदि परिवार साथ बैठकर भोजन करता है, तो बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं और धीरे-धीरे विभिन्न प्रकार के भोजन स्वीकार करने लगते हैं।
चौथे, जबरदस्ती न करें। ‘यह नहीं खाओगे तो वह नहीं मिलेगा’ जैसी शर्तें बच्चे के मन में भोजन को लेकर नकारात्मक भावना पैदा करती हैं। इसके बजाय कम मात्रा में परोसें और खाने पर उनकी प्रशंसा करें। सकारात्मक प्रोत्साहन अधिक प्रभावी होता है।
पांचवें, निश्चित समय पर भोजन दें। दिनभर थोड़ा-थोड़ा जंक फूड या मिठाई खाने से मुख्य भोजन के समय भूख नहीं लगती। इसलिए फल, दही, अंडा, घर का बना चिवड़ा-सूजी या सूप जैसे स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स दें।
याद रखें, हर बच्चा अलग होता है। धैर्य रखें और धीरे-धीरे स्वस्थ भोजन की आदत विकसित करें। प्यार, रचनात्मकता और नियमित अभ्यास ही बच्चे को पौष्टिक भोजन की ओर ले जाने में मदद करेगा।