नई दिल्ली : देश में ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए कई पहल की गई हैं। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना और इंडस्ट्रियल डिकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना ही इस पहल का उद्देश्य है। हाल के समय में स्टील और फर्टिलाइजर जैसे उद्योगों में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग बढ़ा है।
फर्टिलाइजर सेक्टर का एक महत्वपूर्ण घटक है अमोनिया। नाइट्रोजन आधारित उर्वरक बनाने के लिए यह अनिवार्य है। अमोनिया बनाने के लिए हाइड्रोजन की जरूरत होती है, जो आमतौर पर प्राकृतिक गैस से तैयार किया जाता है।
गैस की कीमत उर्वरकों की कीमत को भी प्रभावित करती है। इस स्थिति को बदलने के लिए कई फर्टिलाइजर कंपनियां अब ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ा रही हैं। देश की ये चार फर्टिलाइजर कंपनियां पहले ही ग्रीन हाइड्रोजन की ओर झुकाव दिखा चुकी हैं। इसके कारण ऊर्जा संकट के समय इन स्टॉक्स की मांग बढ़ी है। आइए देखें इस सूची में कौन-कौन से स्टॉक शामिल हैं।
कोरमंडल इंटरनेशनल : यह कंपनी देश की सबसे बड़ी एग्री सॉल्यूशंस कंपनियों में से एक है। यह फर्टिलाइजर, फसल सुरक्षा उत्पाद, बायो-पेस्टिसाइड, स्पेशलिटी न्यूट्रिएंट और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर जैसे कई उत्पाद बनाती है। कंपनी का फाइनेंशियल प्रदर्शन भी काफी स्थिर रहा है।
चंबल फर्टिलाइजर : यूरिया उत्पादन में इस कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका वित्तीय प्रदर्शन भी काफी स्थिर रहा है।
दीपक फर्टिलाइजर एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन : पिछले क्वार्टर में कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन ऊर्जा स्रोतों की व्यवस्था को लेकर कंपनी काफी प्रगति कर रही है।
गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स : यह कंपनी भी ग्रीन एनर्जी के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग में यह कंपनी सूची में ऊपर रह सकती है।
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