मुंबई : अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के युद्ध के कारण पूरी दुनिया में विमानन उद्योग को बड़ा झटका लगा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की शीर्ष 20 एयरलाइन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 5 हजार 300 करोड़ डॉलर कम हो गया है।
28 फरवरी से संघर्ष शुरू होने के बाद ही कई पश्चिम एशियाई देशों में कई कंपनियों को वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं बंद या सीमित करनी पड़ीं। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ान शेड्यूल गंभीर रूप से प्रभावित हुआ और इसका सीधा असर कंपनियों की आय पर पड़ा।
एयरलाइन कंपनियों के अधिकारी चेतावनी दे चुके हैं कि युद्ध के चौथे सप्ताह में ही ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही है। यदि यह स्थिति और खराब होती है, तो दुनिया भर में उड़ानों के संचालन में बड़े व्यवधान देखने को मिल सकते हैं।
सबसे बड़ा दबाव जेट ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से संघर्ष शुरू होने के बाद जेट ईंधन की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। सामान्यत: एक एयरलाइन की कुल संचालन लागत का लगभग एक-तिहाई ईंधन पर जाता है। इस वजह से इस मूल्यवृद्धि ने कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है।
विश्लेषकों के अनुसार इस स्थिति का सीधा प्रभाव यात्रियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि लागत को संभालने के लिए एयरलाइन कंपनियों को किराया बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी क्षेत्रीय युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तेज़ी से असर कैसे पड़ता है, यह युद्ध इसका बड़ा उदाहरण है। केवल राजनीति या सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विमानन जैसे सामान्य वाणिज्यिक क्षेत्र भी इस झटके से बच नहीं पाए।