नई दिल्ली: देश की बैंकिंग प्रणाली में भारी मात्रा में दावेदार रहित जमा (dormant) राशि पड़ी हुई है जिसे लेकर केंद्र की चिंता लगातार बढ़ रही है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 2024 के अंत तक कम से कम 10 साल या उससे अधिक समय तक निष्क्रिय रहने वाले सेविंग्स, करंट और अन्य डिपॉजिट अकाउंट्स में जमा बकाया नदारद राशि बढ़कर 62,314 करोड़ रुपये हो गई है। इस भारी राशि का मुख्यतः उन ग्राहकों या उनके उत्तराधिकारियों से संबंध है जो विभिन्न कारणों से अपने बैंक अकाउंट के अस्तित्व या उसमें जमा राशि के बारे में अब अवगत नहीं हैं।
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इस दावेदार रहित जमा राशि का अधिकांश हिस्सा सरकारी बैंकों के पास है। सरकारी बैंकों में लगभग 50,907.91 करोड़ रुपये बकाया हैं। एकल बैंक के रूप में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) इस सूची में शीर्ष पर है जहां बकाया नदारद राशि 16,968.41 करोड़ रुपये है। देश का सबसे बड़ा बैंक होने और भारी संख्या में ग्राहकों के कारण SBI में यह राशि अधिक प्रतीत होती है लेकिन कुल मिलाकर यह विषय बड़े बैंकों में ग्राहक जागरूकता और संचार प्रणाली की सीमाओं को सामने लाता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र ने पहल की है। अक्टूबर 2025 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘Your Money, Your Right’ नामक जागरूकता अभियान शुरू किया। जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अपने या परिवार के अज्ञात पड़े बैंक जमा की जानकारी लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार के अनुसार जागरूकता बढ़ने पर कई परिवार अपनी पात्र राशि वापस पा सकते हैं।
RBI के नियमों के अनुसार किसी अकाउंट में लगातार 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होने पर उस अकाउंट में जमा राशि या बकाया DEED (Depositor Education and Awareness) फंड में स्थानांतरित कर दिया जाता है। हालांकि राशि इस कोष में चली जाती है लेकिन जमाकर्ता या उसके उत्तराधिकारी का अधिकार समाप्त नहीं होता। उचित प्रक्रिया अपनाकर आवेदन करने पर यह राशि वापस पाई जा सकती है।
बकाया नदारद राशि वापस पाने की प्रक्रिया तुलनात्मक रूप से आसान है। मूल अकाउंटधारक, संयुक्त अकाउंट में जीवित भागीदार, कानूनी उत्तराधिकारी या अनुमोदित हस्ताक्षरकर्ता संबंधित बैंक शाखा में आवश्यक KYC दस्तावेज जमा कर दावा कर सकते हैं। यदि कोई अकाउंट को पुनः सक्रिय करना चाहता है तो सत्यापन के बाद बैंक उसे सक्रिय कर देता है। और अंतिम निपटान के मामले में अकाउंट बंद करने का आवेदन किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार थोड़ी जागरूकता और पहल से कई परिवार इस भारी बकाया नदारद राशि के सही हकदार बन सकते हैं।