रो–को (रोहित–कोहली) के समर्थक चाहे जितनी आवाज उठाएं लेकिन नए साल में अगर कोई बड़ी अनहोनी नहीं होती है तो भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर की कुर्सी सुरक्षित ही रहने वाली है। बीसीसीआई के साथ गंभीर का अनुबंध 2027 के वनडे विश्व कप तक है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि कोच गंभीर पर उनका भरोसा कायम है। आईसीसी चेयरमैन जय शाह का समर्थन भी पूर्व भाजपा सांसद गंभीर के साथ है। सबसे अहम बात यह है कि बोर्ड फिलहाल लाल गेंद और सफेद गेंद के लिए अलग-अलग कोच नियुक्त करने के बारे में नहीं सोच रहा।
इस साल होने वाले टी20 विश्व कप में भारत को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। टीम ने अपने पिछले 20 मैचों में से 17 में जीत दर्ज की है। इसके अलावा, जुलाई 2024 में जिम्मेदारी संभालने के बाद गंभीर की कोचिंग में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप भी जीता है। यहां तक कि अगर घरेलू मैदान पर टी20 विश्व कप में भारत सेमीफाइनल या फाइनल में हार भी जाता है, तब भी सफेद गेंद के प्रारूप में गंभीर को हटाए जाने की संभावना बेहद कम है।
दूसरी ओर, 2026 के क्रिकेट कैलेंडर पर नजर डालें तो भारत को लाल गेंद से सिर्फ चार टेस्ट खेलने हैं, अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट और नवंबर–दिसंबर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट। दोनों ही सीरीज विदेशी धरती पर होंगी। इन चार टेस्ट के अलावा, 2025–2027 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में भारत के लिए केवल एक ही सीरीज बचती है, 2027 जनवरी–फरवरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट की सीरीज।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू मैदान पर 0–2 की हार के बाद भारत डब्ल्यूटीसी तालिका में छठे स्थान पर खिसक गया है। फाइनल में पहुंचने की उम्मीद बनाए रखने के लिए बचे हुए 9 टेस्ट में से कम से कम 6 जीतना जरूरी है, जो आसान नहीं है। गंभीर के कार्यकाल में भारत ने अब तक 19 टेस्ट खेले हैं—7 में जीत, 10 में हार और 2 ड्रॉ। इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि अक्टूबर 2024 में घरेलू मैदान पर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 0–3 और पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0–2 की हार। फरवरी 2013 से अक्टूबर 2024 तक करीब साढ़े ग्यारह सालों में भारत को घरेलू मैदान पर कोई टेस्ट सीरीज नहीं गंवानी पड़ी थी। लाल गेंद में गंभीर की कोचिंग की लगातार आलोचना हो रही है लेकिन इंग्लैंड दौरे पर रोहित–विराट की गैरमौजूदगी में अनुभवहीन टीम के साथ पांच टेस्ट की सीरीज 2–2 से ड्रॉ कराना एक सकारात्मक पहलू भी रहा।
गंभीर के कार्यकाल में तीन सीनियर खिलाड़ी—अश्विन, रोहित और विराट टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। हालांकि महान बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर यह मानने को तैयार नहीं हैं कि खराब टेस्ट प्रदर्शन के लिए केवल गंभीर ही जिम्मेदार हैं। उनका तर्क है कि घरेलू मैदान पर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ जिस 0–3 की हार की बात हो रही है, उस सीरीज में रोहित, विराट और अश्विन तीनों मौजूद थे। फिर भी नतीजा वही रहा। हर चीज का दोष गंभीर पर नहीं डाला जा सकता।
संक्षेप में कहा जाए तो सफेद गेंद में ‘सुपरहिट’ और लाल गेंद में ‘सुपरफ्लॉप’ ऐसी छवि बन गई है गंभीर की लेकिन खुद गंभीर इससे खास परेशान नहीं दिखते। ‘स्टार कल्चर’ खत्म करने की उनकी नीति के तहत रोहित और विराट जैसे दिग्गजों को भी वर्षों बाद विजय हज़ारे ट्रॉफी खेलने पर मजबूर होना पड़ा। इसी वजह से उनका कार्यकाल अब तक “द क्यूरियस केस ऑफ गौतम गंभीर” बना हुआ है।
टेस्ट क्रिकेट में नए कप्तान शुभमन गिल हैं। 2026 में न तो कप्तान शुभमन और न ही कोच गंभीर को इस फॉर्मैट में बड़ी परीक्षा से गुजरना है क्योंकि पूरे साल सिर्फ चार टेस्ट ही खेले जाने हैं। हालांकि अगर अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट की सीरीज 0–2 से हार जाती है तो लाल गेंद में गंभीर एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में आ जाएंगे और तब बोर्ड विकल्पों पर विचार कर सकता है।
सफेद गेंद में फिलहाल ऐसी कोई चिंता नहीं है। इस साल के टी20 विश्व कप के बाद अगला बड़ा आईसीसी टूर्नामेंट 2027 का वनडे विश्व कप है, जो अक्टूबर–नवंबर में होगा। यानी गंभीर के पास वनडे टीम के साथ अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए लगभग दो साल का समय है। अगर अगले डेढ़ साल तक फॉर्म बनी रहती है तो रोहित और विराट विश्व कप टीम में रह सकते हैं लेकिन फॉर्म गिरते ही दबाव बढ़ना तय है, जैसा कि आने वाले विश्व कप से शुभमन का बाहर होना और कप्तान होने के कारण सूर्यकुमार यादव का बच पाना दिखाता है। खराब प्रदर्शन की स्थिति में कप्तान सूर्यकुमार का भी बाहर होना तय माना जा रहा है।