गाजियाबादः “मशीन तो कह रही है, तुम बांग्लादेशी हो।” गाजियाबाद के SHO अजय शर्मा ने दहाड़ लगाई। झुग्गी-बस्ती के भीतर कुछ बुज़ुर्ग कातर चेहरे के साथ खड़े हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस मशीन से उनकी ‘नागरिकता की जांच’ कर रही है। घटना का वीडियो वायरल (इसकी सत्यता की जांच ‘समाचार एई समय' ने नहीं की है) होने के बाद से ही तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं। यह कैसी मशीन है? कब बनाई गई?
वायरल वीडियो में देखा जा रहा है कि गाजियाबाद पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की एक टीम बस्ती में तलाशी अभियान चला रही है। सभी के पहचान-पत्र बारीकी से जांचे जा रहे हैं। अचानक पुलिसकर्मी एक बुज़ुर्ग को पकड़ लेते हैं। उनके साथ एक युवती भी थी। दोनों ने अपने आधार कार्ड और वोटर कार्ड दिखाए लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें छोड़ा नहीं गया।
अचानक SHO अजय शर्मा बुज़ुर्ग को संबोधित करते हुए चिल्लाते हैं, “इसके पीठ पर मशीन लगाओ, ठीक से देखता हूँ।” बुज़ुर्ग तब डर से सिमट जाते हैं। पुलिस अधिकारी को मानो कोई होश नहीं रहता। वे बुज़ुर्ग की पीठ पर अपना मोबाइल फोन सटा देते हैं, जैसे बारकोड स्कैन कर रहे हों। इसके बाद कहते हैं, “यह मशीन तो बता रही है कि तुम बांग्लादेश से आए हो।” बुज़ुर्ग यह मानने से इनकार करते हैं। वे लगातार कहते रहते हैं, “नहीं साहब, मेरा घर बिहार में है। काम के सिलसिले में यहाँ रहता हूँ।”
वीडियो फैलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस की तीखी आलोचना शुरू हो गई। आखिरकार गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की ओर से एक बयान जारी किया गया। उसमें कहा गया, “अपराध नियंत्रण के लिए अस्थायी बस्तियों में संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। उसी प्रक्रिया के तहत पुलिस ने पूछताछ की और दस्तावेज़ों की जांच भी की।”
इसके बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रहस्यमय ‘मशीन’ को लेकर मीम बनाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘अतिसक्रियता’ पर कटाक्ष करते हुए एक यूज़र ने सवाल उठाया, “क्या यह मशीन भ्रष्टाचार भी पकड़ सकती है?” एक अन्य यूज़र की चुटीली टिप्पणी है, “नागरिकता तय करने वाली मशीन बनाने वाले वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि इससे पहले भी अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से गाजियाबाद में तलाशी अभियान चलाया था। उस समय भी बस्ती के निवासियों के पहचान-पत्रों की जांच की गई थी। संदिग्धों से पूछताछ भी की गई थी।