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दिसंबर में GST संग्रह 6% बढ़ा, घरेलू कारोबार में धीमी वृद्धि और आयात से तेज उछाल

रिफंड 31% बढ़ा, सेस में गिरावट; कुछ बड़े राज्यों में संग्रह धीमा, कुछ में मजबूत

By श्वेता सिंह

Jan 01, 2026 19:28 IST

नई दिल्लीः दिसंबर 2025 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 6.1% बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से आयातित वस्तुओं से राजस्व में तेज उछाल के कारण हुई। हालांकि घरेलू कारोबार से GST में वृद्धि धीमी रही। दिसंबर 2024 में GST संग्रह 1.64 लाख करोड़ रुपये था और नवंबर 2025 में यह 1.70 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ था।

घरेलू लेन-देन से राजस्व 1.2% बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा, वहीं आयातित वस्तुओं से राजस्व में 19.7% की बढ़ोतरी हुई, जो 51,977 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान रिफंड में भी 31% की तेजी आई और यह 28,980 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध GST संग्रह 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो साल-दर-साल 2.2% अधिक है। दूसरी ओर सेस संग्रह गिरकर 4,238 करोड़ रुपये रह गया जबकि दिसंबर 2024 में यह 12,003 करोड़ रुपये था।

सरकार ने 22 सितंबर 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर GST दरें कम की थीं। इसके तहत सामान्य वस्तुओं पर दो ही दरें-5% और 18% लागू की गईं। अल्ट्रा-लक्ज़री और डिमेरिट वस्तुओं पर 40% की दर तय की गई, जबकि अब केवल तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर ही कम्पेंसेशन सेस लागू है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव का असर दिसंबर संग्रह पर देखा गया, जिसमें घरेलू राजस्व में वृद्धि धीमी रही, लेकिन आयात और व्यवसायिक वॉल्यूम ने कुल संग्रह को बढ़ाए रखा।

विशेषज्ञों ने इस आंकड़े का विश्लेषण किया है। Deloitte India के पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत में मजबूत वृद्धि के बावजूद GST दरों में कटौती के बाद संग्रह की वृद्धि धीमी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु सहित 17 राज्यों में GST संग्रह में नकारात्मक वृद्धि रही। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में एक अंक की वृद्धि दर्ज हुई।

Grant Thornton Bharat के पार्टनर और टैक्स कंट्रोवर्सी लीडर मनोज मिश्रा ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा से मजबूत योगदान कुल राजस्व को आधार दे रहा है। उनका कहना है कि यह संकेत देता है कि कुछ बड़े राज्यों की कमजोर वृद्धि के बावजूद कुल संग्रह स्थिर बना हुआ है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, GST दरों में कटौती से कीमतें कम हुई हैं और इसका असर घरेलू मांग पर भी पड़ा है। फिर भी व्यवसायिक वॉल्यूम की बढ़ोतरी ने कुल राजस्व में वृद्धि कायम रखी। कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 का GST डेटा दर्शाता है कि भारत में वॉल्यूम ग्रोथ राजस्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है, जबकि कुछ राज्यों में धीमी वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।

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