नई दिल्लीः सरकार ने सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया है। यह कदम स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव और वैश्विक मानकों के अनुरूप टैक्स लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। 1 फरवरी से लागू होने वाली नई ड्यूटी के अनुसार, सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 सिगरेट पर 2,050 से 8,500 रुपये का टैक्स लिया जाएगा। यह ड्यूटी GST के अधिकतम 40 प्रतिशत रेट के अलावा होगी।
क्यों जरूरी था कदम?
भारत में सिगरेट पर पिछले सात साल से टैक्स दर स्थिर रही है। दुनिया के अधिकतर देशों में हर साल टैक्स बढ़ाया जाता है ताकि सिगरेट की कीमतें आय के मुकाबले तेजी से बढ़ें। नई ड्यूटी से यह सुनिश्चित होगा कि सिगरेट महंगी रहें और खपत कम हो।
वर्तमान में भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स लगभग 53 प्रतिशत है। WHO के अनुसार, तंबाकू खपत कम करने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत टैक्स होना चाहिए। कई देशों में यह इससे अधिक है। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में यह 80-85 प्रतिशत है, जबकि फ्रांस, न्यूजीलैंड और कई यूरोपीय देशों में 75-80 प्रतिशत। मध्य-आय वाले देश जैसे तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, फिलिपींस और चिली ने भी सिगरेट टैक्स बढ़ाकर WHO मानक के करीब पहुंचाया है।
राजस्व और स्वास्थ्य पर असर
GST कंपेंसेशन सेस 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। नई एक्साइज ड्यूटी से सरकार को राजस्व स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। भारत में तंबाकू-संबंधी बीमारियों की सालाना लागत लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। नई ड्यूटी से सिगरेट महंगी होंगी और तंबाकू-संबंधी रोगों का आर्थिक और सामाजिक बोझ घटेगा।
विशेषज्ञों का कहना
वित्त मंत्रालय के अनुसार, नया टैक्स अत्यधिक नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। ड्यूटी बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग पर असमान बोझ नहीं पड़ेगा। टैक्स बढ़ोतरी से सिगरेट की खपत कम होगी और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव घटेगा।
सरकार का यह कदम सिगरेट महंगी करने और स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में है, साथ ही राजस्व स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक बेस्ट प्रैक्टिस अपनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।