नई दिल्ली : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसके बावजूद विश्व बैंक का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत आधार पर टिकी हुई है और मौजूदा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।
एक सम्मेलन में संस्था के विशेषज्ञों ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर बढ़ा है, लेकिन भारत के पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा तंत्र मौजूद है। देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, नियंत्रित महंगाई दर और लचीली आर्थिक नीतियां हैं, जो इसे वैश्विक दबाव के बीच स्थिर बनाए हुए हैं।
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के प्रैक्टिस डायरेक्टर सेबास्टियन एकार्डट ने कहा कि भारत की नीतिगत मजबूती और तेज विकास दर इस चुनौतीपूर्ण समय में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते और श्रम सुधार जैसे कदमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ किया है।
हाल ही में जारी ‘साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट’ रिपोर्ट में विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। हालांकि चालू वित्त वर्ष में यह दर कुछ घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, फिर भी यह पहले के आकलन से बेहतर है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत घरेलू मांग और स्थिर निर्यात इस वृद्धि को गति दे रहे हैं।
संस्था के मुख्य अर्थशास्त्री ऑरेलियन क्रूज ने कहा कि ऊंचे टैरिफ दबाव के बावजूद भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। कर राहत और जीएसटी दरों में कमी जैसे उपायों से घरेलू खपत बढ़ी है। जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है। साथ ही निर्यात और निवेश जैसे क्षेत्रों ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।
हालांकि विश्व बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के कारण भविष्य में व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। खासकर यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो इसका प्रभाव आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।
इस बीच प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत न केवल टिके रहने में सफल रहा है, बल्कि हर संकट से सीख लेकर और अधिक मजबूत बनकर उभरा है।