नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के आम निर्यात पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। समुद्री मार्गों में रुकावट और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। खासकर रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की कमी और बढ़ते परिवहन खर्च ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
दरअसल, होरमुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्तों पर बाधाएं आने से माल ढुलाई प्रभावित हो रही है। कई कंटेनर बीच रास्ते में अटके हुए हैं या उन्हें लंबा मार्ग अपनाकर भेजा जा रहा है। जिससे समय और लागत दोनों में वृद्धि हो रही है।
भारत दुनिया में आम उत्पादन का बड़ा केंद्र है और हर साल भारी मात्रा में आम का उत्पादन करता है। इस उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशों में निर्यात किया जाता है। देश दशहरी, चौसा, अल्फांसो और लंगड़ा जैसी कई लोकप्रिय किस्म के आमें को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजता है और निर्यात बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास भी करता रहा है।
मध्य पूर्व के देश भारतीय आम के प्रमुख खरीदार हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और कतर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों में अवरोध के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है। हालांकि हाल के दिनों में युद्धविराम की संभावनाओं से यह उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले समय में स्थिति सामान्य हो सकती है।
निर्यातकों का कहना है कि आम जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए रेफ्रिजरेटेड कंटेनर बेहद जरूरी होते हैं, जिनमें नियंत्रित तापमान पर फल सुरक्षित रखे जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में इन कंटेनरों की उपलब्धता कम हो गई है और उनके आवंटन में भी देरी हो रही है। इसकी वजह से आम के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, खासकर प्रीमियम किस्मों जैसे अल्फांसो, केसर और बांगनपल्ली के लिए जोखिम ज्यादा है।
परिवहन लागत में भी भारी उछाल देखा गया है। हाल के महीनों में रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों का किराया काफी बढ़ गया है और अतिरिक्त शुल्क भी जोड़े जा रहे हैं। जिससे निर्यात का खर्च कई गुना तक बढ़ गया है। इस वजह से कई मामलों में निर्यात अब लाभकारी नहीं रह गया है।
निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा स्थिति की वजह से बड़ा ऑर्डर पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर निर्यात की मात्रा और आय पर पड़ेगा। साथ ही किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में भारत ने बड़ी मात्रा में ताजा आम का निर्यात किया था, जिससे अच्छी विदेशी आय हुई थी। लेकिन मौजूदा संकट इस प्रगति पर असर डाल सकता है।
इसका प्रभाव देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों पर भी पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के किसान खासे चिंतित हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादक अंतरराष्ट्रीय बाजार पर काफी निर्भर रहते हैं, इसलिए वे इस स्थिति को लेकर विशेष रूप से परेशान हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए, तो भारत के आम निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है, जिससे निर्यातकों के साथ-साथ किसानों की आय पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।