नई दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों का उद्देश्य बैंकिंग नियमों को सरल बनाना, छोटे कारोबारियों को कर्ज आसान करना और वित्तीय बाजार में नकदी यानी तरलता बढ़ाना है।
आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि नए कदमों से बैंकों पर नियमों का बोझ कम होगा और वे अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। केंद्रीय बैंक ने पूंजी पर्याप्तता (CRAR) से जुड़े नियमों में भी ढील देने का प्रस्ताव रखा है। अब बैंकों को अपनी तिमाही कमाई को पूंजी में शामिल करने के लिए पहले जैसी सख्त शर्तों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय स्थिति बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, आरबीआई ने बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व (आईएफआर) रखने की अनिवार्यता खत्म करने का भी प्रस्ताव दिया है। यह रिजर्व पहले निवेश में होने वाले नुकसान से बचाव के लिए रखा जाता था। अब अन्य सुरक्षा उपाय मौजूद होने के कारण इसे हटाने का निर्णय लिया गया है जिससे नियमों में दोहराव कम होगा।
आरबीआई बैंक प्रबंधन में भी सुधार करना चाहता है। इसके तहत बैंक बोर्ड के सामने रखे जाने वाले मामलों की संख्या की समीक्षा की जा रही है ताकि बोर्ड रणनीतिक फैसलों और जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान दे सके।
छोटे उद्योगों यानी MSME को राहत देने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेड्स) में शामिल होने की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा। अब MSME के लिए जटिल जांच प्रक्रिया हटाई जाएगी, जिससे उन्हें जल्दी और आसानी से कार्यशील पूंजी मिल सकेगी।
वित्तीय बाजार में सुधार के तहत आरबीआई ने टर्म मनी मार्केट में गैर-बैंक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने का फैसला किया है। अब NBFC, ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से बाजार में नकदी बढ़ेगी, ब्याज दरों के बीच तालमेल बेहतर होगा और देश की वित्तीय प्रणाली और मजबूत बनेगी।