नई दिल्लीः ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के वार्षिक सम्मेलन में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश के भविष्य को लेकर बड़ा विज़न साझा किया और कहा कि “टेक्नोलॉजी फॉर लाइफ” सरकार की प्राथमिक सोच है, जो आने वाले समय में भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। साथ ही उन्होंने अगले सात वर्षों में भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र में नंबर एक बनाने का लक्ष्य भी रखा।
तकनीक और नवाचार पर जोर
अपने संबोधन में गडकरी ने कहा कि तकनीक आधारित बदलाव, रिसर्च और नवाचार भारत की प्रगति को नई दिशा देंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन पूरी तरह हासिल किया जा सकता है।
लॉजिस्टिक्स सुधार और जलमार्ग की अहमियत
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने शिपिंग मंत्री के कार्यकाल की पहलें याद कीं। उन्होंने बताया कि 110 नदियों को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया गया ताकि माल ढुलाई की लागत कम की जा सके। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि सड़क मार्ग से परिवहन पर लगभग 10 रुपये, रेल से 6 रुपये और जलमार्ग से सिर्फ 1 रुपये का खर्च आता है। उन्होंने जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों के विकसित नदी-बंदरगाह नेटवर्क का भी उदाहरण दिया।
कचरे से सड़क निर्माण का नवाचार
गडकरी ने बुनियादी ढांचे में कचरे के उपयोग को भी एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्टील स्लैग जैसे अपशिष्ट पदार्थ पहले बेकार माने जाते थे, अब शोध के बाद सड़क निर्माण में उपयोग किए जा रहे हैं। लगभग 80 लाख टन कचरे को अलग करके द्वारका एक्सप्रेसवे, मुंबई-दिल्ली हाईवे और अहमदाबाद-दिल्ली मार्ग जैसे प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किया गया है।
इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन तकनीक का विस्तार
तकनीकी प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइड्रोजन ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों ने ऑटो सेक्टर को तेजी से बदल दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि देश में पहली इलेक्ट्रिक कार और हाइड्रोजन आधारित ट्रकों की शुरुआत के समय संदेह था, लेकिन अब इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर, ट्रक और बसें आम हो चुकी हैं।
ऑटोमोबाइल उद्योग की तेज़ वृद्धि
ऑटोमोबाइल उद्योग की वृद्धि का उल्लेख करते हुए गडकरी ने बताया कि 2014 में इस क्षेत्र का आकार करीब 7 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत ने करीब 7-8 महीने पहले जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बनने का दर्जा हासिल किया है। फिलहाल अमेरिका 79 लाख करोड़ रुपये और चीन 49 लाख करोड़ रुपये के साथ आगे हैं। सरकार का लक्ष्य अगले सात वर्षों में भारत को इस क्षेत्र में शीर्ष स्थान पर पहुंचाना है, जिसे उन्होंने कठिन लेकिन संभव बताया।
रोजगार और अर्थव्यवस्था में योगदान
गडकरी ने यह भी बताया कि ऑटो उद्योग देश में लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है और यह केंद्र व राज्य सरकारों के लिए जीएसटी का सबसे बड़ा स्रोत होने के साथ-साथ निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है तो ऑटोमोबाइल निर्यात बढ़ाना होगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की आर्थिक वृद्धि को बड़ा बल मिलेगा।