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साहित्य अकादमी और महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज के संयुक्त प्रयास से सजा साहित्यिक मंच

बहुभाषीय सहभागिता के साथ मातृभाषा के महत्व पर हुआ गहन विमर्श ।

By रजनीश प्रसाद

Feb 22, 2026 18:12 IST

कोलकाता : साहित्य अकादमी और महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के अवसर पर एक विशेष साहित्यिक मंच कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘मातृभाषा में शिक्षा’ रहा जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के विद्वानों ने मातृभाषा की उपयोगिता, सांस्कृतिक प्रासंगिकता और शैक्षणिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर बांग्ला के चर्चित लेखक एवं कथाकार शंकर के निधन पर एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

प्रारंभिक सत्र की शुरुआत साहित्य अकादमी के सहायक संपादक क्षेत्रवासी नायक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मातृभाषा को शिक्षा का आधार बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का स्वाभाविक विकास होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य अमित मजुमदार ने की।

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज और रिसर्च सेंटर के प्राचार्य स्वामी दिव्यप्रज्ञानन्द जी ने संस्कृत में वक्तव्य प्रस्तुत किया। प्रोफेसर शिवाजी प्रतिम बसु ने बांग्ला भाषा की समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए अंग्रेजी से आए तकनीकी शब्दों को सरल बनाने की आवश्यकता बताई। कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राजश्री शुक्ला ने कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का आधार भी है। आई.आई.एम. कोलकाता के प्रोफेसर एवं मैथिली कवि विद्यानंद झा ने मैथिली कविताओं का पाठ करते हुए कोलकाता में मैथिली भाषा की ऐतिहासिक उपस्थिति को रेखांकित किया।

द्वितीय सत्र में प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं अनुवादक डॉ. ऋषि भूषण चौबे द्वारा अनूदित पुस्तक ‘कविगुरु रवींद्र की गीतांजलि का भोजपुरी अनुवाद’ का लोकार्पण किया गया। उन्होंने मातृभाषा में लेखन की प्रेरणा को सशक्त बनाने की बात कही। संथाली भाषा के प्रोफेसर सुबोध हांसदा ने संथाली भाषा आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डाला। शिक्षिका वीणापाणि देवता ने ओड़िया भाषा का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। साहित्य अकादमी के ‘युवा पुरस्कार’ (सिंधी भाषा) से सम्मानित लेखक मंथन बचानि ने मातृभाषा में सृजन की अनिवार्यता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर में साहित्य अकादमी द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी एवं बिक्री का आयोजन भी किया गया, जो सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चला। इसमें छात्रों और साहित्य प्रेमियों ने विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम का संचालन कॉलेज के बांग्ला विभाग के सहायक प्राध्यापक कौशिक घोष ने किया। अंत में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कार्तिक चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र, शोधार्थी और साहित्यकार उपस्थित रहे।

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