सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार कर्मचारियों के संगठन 'संग्रामी संयुक्त मंच' ने मामला दायर किया है। आरोप लगाया गया है कि देश की सबसे बड़ी अदालत का आदेश होने के बावजूद राज्य सरकार बकाया DA या महंगाई भत्ता नहीं दे रही है। इससे पहले मंच ने राज्य के मुख्य सचिव और वित्त मंत्री को भी कोर्ट की अवमानना का नोटिस भेजा था।
कहा गया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तुरंत पालन नहीं करते हैं तो उन्हें दूसरे कानूनी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मंच का दावा है कि राज्य ने अभी तक 25 प्रतिशत DA को तुरंत निपटाने के लिए कोई फैसला नहीं लिया है। नतीजतन उन्हें अवमानना का नोटिस भेजने के बाद फिर से सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज करना पड़ा।
गौरतलब है कि DA मामले में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य बकाया DA का शत-प्रतिशत ही दे। इसमें से 25 प्रतिशत बकाया DA तुरंत देनी थी। जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने 6 मार्च तक चार सदस्यीय कमेटी का गठन करने का आदेश दिया, जो यह तय करेगी कि बाकी 75 प्रतिशत कैसे और कितनी किश्तों में दिया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले DA में देरी हमेशा नहीं चल सकती। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार अभी भी DA देने में देरी कर रही है। इसलिए उन्हें कोर्ट की अवमानना का केस करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस बारे में संयुक्त मंच के नेता भास्कर घोष का कहना है कि कोर्ट के 25 प्रतिशत DA देने के फैसले पर हमने कोई तत्परता या प्रशासनिक कार्य नहीं देखा है। जानबूझकर कोर्ट की अवमानना की गयी है। इसीलिए हम फिर से मामला दायर करने जा रहे हैं।" भाजपा सांसद और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार DA नहीं देगी। कर्मचारी कोर्ट में लड़ रहे हैं। हमारा उन्हें पूरा समर्थन है। कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने वाली है। तब सरकार राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय दर पर ही DA देने की व्यवस्था करेगी।