SIR के मसौदा सूची से करीब 54 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नवान्न से भाजपा और चुनाव आयोग पर एक साथ हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि 2002 की मतदाता सूची को क्यों 'बेसलाइन' माना गया? उन्होंने कहा, '2002 का मैच ही तो मिसमैच है। यह चुनाव आयोग की सबसे बड़ी गलती है। लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।'
उन्होंने बांकुड़ा के तालडांगा में फॉर्म-7 (नाम हटाने का फॉर्म) से लदी एक गाड़ी की तस्वीर दिखाकर भाजपा पर जानकारी चुराने का भी आरोप लगाया।
तृणमूल ने दावा किया है कि बांकुड़ा में एक गाड़ी की तलाशी लेने पर करीब 3 से 4 हजार फॉर्म 7 बरामद हुए। ममता बनर्जी ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान अपने मोबाइल फोन से तस्वीर दिखाकर सीधे भाजपा पर निशाना साधा। भाजपा और चुनाव आयोग को एक साथ जोड़ते हुए उन्होंने कहा, "मैं एक तस्वीर दिखा रही हूं। वे करीब 10 हजार फॉर्म डिलीट करने के लिए एक गाड़ी में ले गए।"
काला जादू करके गणतांत्रिक अधिकार नहीं छीन सकेंगे
ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलकर मतदाताओं की जानकारियां चुराने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया, "फाइल के बाद फाइल, बोरियों में भरे हुए कागज। क्या ये लोगों के अधिकारों की चोरी नहीं है?" उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "वे जानकारी चुरा रहे हैं, गणतंत्र को चुरा रहे हैं। वे लोगों को जीने नहीं दे रहे हैं। जिंदा लोगों को मुर्दा बता रहे हैं।"
ममता बनर्जी ने न सिर्फ मतदाता सूची के मसौदा से नाम हटाने के लिए बल्कि सुनवाई के दौरान भी 'अव्यवस्था' के लिए भी चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, 'चुनाव आयोग भाजपा के फायदे के लिए काम कर रही है। उन्हें लगता है कि वे ब्लैक गेम और काला जादू करके लोगों के गणतांत्रिक अधिकार छीन लेंगे। ऐसा नहीं होगा।'
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बिहार में अंतिम मतदाता सूची जारी होने होने के दिन ही चुनाव की तारीख घोषित कर दी गयी थी। ममता बनर्जी ने यह मुद्दा भी उठाया और चेतावनी दी, 'यहां ऐसा नहीं होगा। वे समझ नहीं पाए थे लेकिन हमने पकड़ लिया है।'
महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि SIR में महिलाओं को लक्ष्य बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'बिना किसी वजह के गलत तरीके से, गैर-कानूनी तरीके से 54 लाख लोगों का नाम हटा दिया गया है। उन्होंने महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने शादी की और अपने ससुराल चली गईं और अपना सरनेम बदल लिया। उनका नाम नाम हटा दिया गया। उनका कहना है कि नाम मैच नहीं कर रहा है।'
चुनाव आयोग ने बंगाल में स्वतंत्र ऑब्जर्वर के तौर पर माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किया हैं। वे सुनवाई में भी मौजूद रह रहे हैं। ममता बनर्जी ने यह आरोप लगाते हुए कि भाजपा के 'दलदास' को ही माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है, कहा, 'सुनवाई में माइक्रो ऑब्जर्वर रखे गए हैं। लेकिन कोई BLO, AERO नहीं हैं। वे भाजपा के दलदास हैं। यहीं नाम हटा रहे हैं। कागजात देखने के बाद कह रहे हैं कि नॉट फाउंडिंग एनी एविडेंस (कोई सबूत नहीं मिला)। कह रहे हैं एंटी-नेशनल (देश विरोधी) ।' ममता बनर्जी ने दावा किया कि सिर्फ बंगाल में ही माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं।
नहीं दी जा रही है कोई रसीद
सुनवाई में बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, आधार या पैन कार्ड की कॉपी जमा करनी होती है। लेकिन ममता बनर्जी ने यह भी शिकायत दर्ज करवायी कि इसकी कोई रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा, 'अगर आप स्कूल-कॉलेज में दाखिला लेते हैं, अस्पताल जाते हैं, दुकान से सामान खरीदते हैं तो वे आपको रसीद दी जाती है। यहां पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, पैन, आधार देखने के बाद रसीद क्यों नहीं दी जाएगी? आप रसीद मांग लें।'
लॉजिकल गड़बड़ियों के नाम पर करीब 1 करोड़ नाम बाहर करने की साजिश की जा रही है। यह आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'लॉजिकल गड़बड़ियों के नाम पर 1 करोड़ 33 से 36 लाख नाम लिख कर रखा गया है। उन्होंने किसी को नहीं दिया। सिर्फ भाजपा जानती है। यह बहुत बड़ी साजिश है।' ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बंगाल के हितों और शांति से कोई समझौता नहीं होगा।
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करती ममता बनर्जी :