सर्दियां भले ही देर से आयी हो लेकिन सांतरागाछी झील पक्षियों के कलरव से गुंजायमान रहा। सर्दियां दिसंबर के अंत तक शुरू होते ही सांतरागाछी बर्ड सेंक्चुअरी में इस साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचे। पूरी झील पक्षियों की चहचहाहट से भर गयी। पक्षी और प्रकृति प्रेमी भी यह नजारा देखकर खुश हो गए हैं।
हालांकि शुरुआत में प्रवासी पक्षियों की संख्या कम रही लेकिन बाद में पक्षियों की संख्या बढ़ने लगी। हालांकि झील के रख-रखाव का काम देर से शुरू होने की वजह से एक डर यह भी लग रहा था कि पक्षियों को अगर बसने की वजह नहीं मिली या कम मिली तो वे कहीं और चल जाएंगे।
सर्दी जैसे-जैसे बढ़ती गयी हालात पहले से बेहतर होने लगे। हर साल की तरह इस साल भी स्वयंसेवी संस्था 'प्रकृति संसद' ने जनवरी की शुरुआत में सांतरागाछी बर्ड सैंक्चुअरी में पक्षियों की गिनती पूरी की। बताया जाता है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल पक्षियों की संख्या में करीब 1,000 की वृद्धि हुई है।
पिछले साल जहां पक्षियों की कुल संख्या 4,197 थी वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 5,608 हो गई है। ये आंकड़े पक्षी प्रेमियों के लिए उम्मीद की किरण हैं। यहां जो पक्षी अभी पाए गए हैं उनमें सिर्फ लेजर व्हिसलर ही नहीं बल्कि इस साल गडवाल, नकटा और पर्पल हेरॉन समेत कई तरह के प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बायोडायवर्सिटी को बचाने में सांतरागाछी झील की अहमियत एक बार फिर साबित हुई है। दक्षिण पूर्व रेलवे के सांतरागाछी स्टेशन से सटी यह झील हर साल सर्दियों की शुरुआत से ही प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाती है। मानस सरोवर, हिमालय की तलहटी और साइबेरिया से पक्षी यहां आते हैं।
हालांकि झील को ठीक करने वाली स्वयंसेवी संस्था 'नेचर मेट्स' ने इस साल देर से काम शुरू किया लेकिन उन्होंने युद्धकालिन तत्परता के साथ जलकुंभी से भरे इस द्वीप को पक्षियों के रहने के लायक बनाया। इसलिए जैसे-जैसे सर्दियां बढ़ी पक्षियों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि दर्ज की गयी।