हावड़ा: ट्रेन सेवा को सुचारू बनाए रखना और रेलवे में होने वाले अपराध को लेकर रेलवे पहले से ही चिंतित है। इस स्थिति में चलती ट्रेन में पत्थर फेंकने की घटना उसके लिए गले की हड्डी बन गई है। धीरे-धीरे यह समस्या पूरे देश में फैल रही है। इसके परिणामस्वरूप एक ओर रेलवे की संपत्ति नष्ट हो रही है, वहीं यात्रियों के बीच भी डर फैल रहा है। इसे लेकर ट्रेन में पत्थर फेंकने वालों को रोकने के लिए रेलवे ने 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है।
रेल के कड़े कदम और निगरानी
रेल मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कहीं भी पत्थर फेंकने की घटना हुई, तो रेलवे की तरफ से मामला दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में आरपीएफ की निगरानी बढ़ाई जा रही है। रेल पुलिस से भी मदद मांगी गई है। अब से जिन जगहों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं हो रही हैं, वहां आरपीएफ जवानों को रेल पुलिस के साथ लेकर रेलवे लाइन की गश्त करेंगे।
सांख्यिकी और गिरफ्तारी का विवरण
रेलवे की सांख्यिकी के अनुसार, 2025 की जुलाई से दिसंबर तक, छह महीनों में पूरे देश में ट्रेन में पत्थर फेंकने के कुल 1,698 मामले दर्ज किए गए। इसमें नॉर्थ रेलवे में सबसे अधिक 363 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद ईस्ट सेंट्रल रेलवे का नंबर है। इस क्षेत्र में कुल 219 मामले हुए। साउथ सेंट्रल रेलवे में मामलों की संख्या 140 है।
इसके अलावा, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे में 126, वेस्टर्न रेलवे में 116, साउदर्न रेलवे में 108, सेंट्रल रेलवे में 96, ईस्टर्न रेलवे में 71, नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे में 67, साउथ वेस्टर्न रेलवे में 80, वेस्ट सेंट्रल रेलवे में 77, ईस्ट कोस्ट रेलवे में 50, साउथ ईस्टर्न रेलवे में 51, साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में 51, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में 55, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे में 25 और कोंकण रेलवे में तीन मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी घटनाओं में अब तक कुल 665 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी जोनों में ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाएं बढ़ी हैं।