नयी दिल्लीः सरकार यूनियन बजट 2026 में पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए एक व्यापक सुधार योजना पेश करने पर विचार कर रही है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय सरकारी बैंकों को वैश्विक स्तर पर सबसे बेहतरीन बैंकों की श्रेणी में लाना है और इसे विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्तावित योजना में बैंकों की संस्थागत रणनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और एडवांस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उनकी समग्र कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाई जा सके।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत पब्लिक सेक्टर बैंकों को दुनिया के टॉप 20 बैंकों में शामिल करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसमें ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट की बेहतरीन प्रैक्टिस को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह 2047 तक दुनिया के शीर्ष 20 बैंकों की सूची में कम से कम दो भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों को देखना चाहती है, और प्रस्तावित रिफॉर्म इसी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम. नागराजू ने कहा कि सरकारी बैंक अब केवल अस्तित्व बनाए रखने के स्तर से आगे बढ़ चुके हैं। वे धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुंच रहे हैं, जहां वे विकास, नवाचार और नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। इस योजना के तहत एसेट क्वालिटी को मजबूत करने, रिस्क मैनेजमेंट को सुधारने और एक ठोस रिजोल्यूशन फ्रेमवर्क तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, एक आधुनिक और समावेशी कार्यबल संरचना विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा, जिससे बैंकों की लीडरशिप और संचालन दोनों मजबूत हो सकें।
मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल मुनाफा लगभग 93,675 करोड़ रुपये रहा है। इसी अवधि में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स घटकर 2.30 प्रतिशत पर आ गए हैं, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। यह संकेत करता है कि सरकारी बैंक वित्तीय मजबूती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और उनकी एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है।
नवंबर 2025 में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों को निर्देश दिया था कि वे बदलते वित्तीय माहौल में स्थायी मुनाफा सुनिश्चित करने के लिए अपने रिस्क मैनेजमेंट, अंडरराइटिंग प्रैक्टिस और ऑपरेशनल रेजिलिएंस को मजबूत करें। यही दिशा अब यूनियन बजट 2026 में प्रस्तावित रिफॉर्म के जरिए आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के सफल कार्यान्वयन से सरकारी बैंक न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।
इस योजना के लागू होने के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों की भूमिका केवल वित्तीय सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे अर्थव्यवस्था के विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक सक्रिय नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे। इससे न सिर्फ बैंकों की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश की वित्तीय प्रणाली की मजबूती और निवेशकों के विश्वास में भी इजाफा होगा।