नयी दिल्लीः नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को संसद में यूनियन बजट 2026-27 को मंजूरी दे दी। इस मंजूरी के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। सरकार के मंत्रियों ने इसे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला बजट बताया है।
बजट पेश करने की संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया
वित्त मंत्री लोकसभा में 2026-27 के लिए भारत सरकार की अनुमानित आय और व्यय का विवरण पेश करेंगी। इसके साथ ही वह Fiscal Responsibility and Budget Management (FRBM) Act, 2003 की धारा 3(1) के तहत दो अहम दस्तावेज सदन में रखेंगी। इनमें मीडियम टर्म फिस्कल पॉलिसी-कम-फिस्कल पॉलिसी स्ट्रेटजी स्टेटमेंट और मैक्रो-इकोनॉमिक फ्रेमवर्क स्टेटमेंट शामिल हैं। साथ ही वित्त मंत्री लोकसभा में Finance Bill, 2026 पेश करने की अनुमति भी मांगेंगी, जो सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को कानूनी रूप देती है।
GST 2.0 और लेबर कोड्स के बाद पहला बजट
FY27 का बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह पहला पूर्ण बजट है जो नए GST सुधार (GST 2.0) और लेबर कोड्स लागू होने के बाद पेश किया जा रहा है। सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समेटकर चार कोड्स बनाए हैं, जो वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा को कवर करते हैं।
नए लेबर कोड्स के तहत असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है, जबकि नियोक्ताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल किया गया है। GST 2.0 के तहत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने पर जोर है। दो-दर संरचना (5% और 18%) के जरिए अनुपालन लागत कम करने और आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं पर कर भार घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
वैश्विक चुनौती: अमेरिकी टैरिफ और निर्यात प्रोत्साहन
इस बार बजट का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इस पृष्ठभूमि में बजट में निर्यात प्रोत्साहन, व्यापार विविधीकरण और घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने जैसे कदमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इकोनॉमिक सर्वे और बजट सत्र की समय-सीमा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही 2025-26 के लिए इकोनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया संसद में पेश कर चुकी हैं। यह सर्वे बजट की पृष्ठभूमि और आर्थिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। बजट सत्र कुल 65 दिनों में 30 बैठकों तक चलेगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा। संसद के दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश पर जाएंगे और 9 मार्च को पुनः कार्यवाही शुरू होगी। इस दौरान स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की Demands for Grants की समीक्षा करेंगी।
नीति, सुधार और वैश्विक संतुलन की परीक्षा
यूनियन बजट 2026-27 केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि सुधारों के क्रियान्वयन, वैश्विक आर्थिक दबावों से निपटने और ‘विकसित भारत’ के दीर्घकालिक विजन को जमीन पर उतारने की परीक्षा है। GST, लेबर सुधार और निर्यात रणनीति के बीच यह बजट आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।