नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026-27 विपक्ष के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट पर तीखा हमला किया है। शत्रुघ्न सिन्हा ने इस बजट को "फेंकू और लपेटू" बताया। वहीं अखिलेश यादव ने इस बजट को सिरे से खारिज कर दिया है। इन दोनों नेताओं का मानना है कि इस बजट में न तो रोजगार सृजन पर ध्यान दिया गया है और न ही किसानों की भलाई या बढ़ते कर्ज पर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं।
यह बजट "फेंकू और लपेटू" है- शत्रुघ्न सिन्हा
TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बजट को "फेंकू और लपेटू" करार देते हुए कहा कि यह बजट "विकसित भारत" के उद्देश्य को पूरा करने के लिए नहीं है। उनका कहना था कि यह बजट न तो रोजगार सृजन पर ध्यान देता है और न ही देश की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों जैसे कर्ज या किसानों के कल्याण पर कोई कदम उठाता है। सिन्हा ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को भारी कर्ज में क्यों डुबो दिया है, लेकिन किसानों के लिए कोई स्पष्ट योजना क्यों नहीं आई?
यह बजट गरीबों और गांवों से दूर- अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के सांसद और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बजट की आलोचना की। उनका आरोप था कि यह बजट गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरी तरह से नकारता है। यादव का कहना था कि इस बजट में न तो रोजगार के अवसर हैं और न ही यह आम जनता की समस्याओं को हल करने के लिए तैयार है। अखिलेश ने कहा कि यह बजट केवल 5 प्रतिशत लोगों के लिए है, बाकी 95 प्रतिशत लोगों का ध्यान ही नहीं रखा गया है।
सरकार का विकास और पर्यावरण पर जोर
विपक्ष के आरोपों के बावजूद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में देश के विकास और पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर दिया। सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और समर्पित मालवाहन गलियारे बनाने की घोषणा की। इन परियोजनाओं से भारत के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के साथ-साथ यात्री और माल परिवहन प्रणाली को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अधिक टिकाऊ बनाया जाएगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 ने जहां सरकार के विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर देने की योजना को स्पष्ट किया है, वहीं विपक्ष ने इसे आम जनता की परेशानियों और जरूरतों से दूर करार दिया है। वित्त मंत्री ने पर्यावरणीय स्थिरता, परिवहन और पर्यटन को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। हालांकि रोजगार और किसानों के कल्याण की दिशा में विपक्ष को निराशा हाथ लगी है। यह बजट आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण का हिस्सा बनता दिख रहा है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच नीतिगत भिन्नताएं उभरकर सामने आई हैं।