नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है। संसद में अपने भाषण में उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति स्थिर रही और पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने “कार्रवाई को प्राथमिकता, व्यापक सुधार और सार्वजनिक निवेश पर जोर” दिया।
वित्त मंत्री ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि “आज व्यापार और बहुपक्षवाद संकट में हैं, संसाधनों और सप्लाई चेन तक पहुंच बाधित है। नई तकनीकें उत्पादन प्रणालियों को बदल रही हैं और जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ा रही हैं। भारत सतत विकास और समावेशन के संतुलन के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ेगा।”
FRBM एक्ट के तहत वित्तीय दस्तावेज पेश
सीतारमण ने FRBM एक्ट 2003 की धारा 3(1) के तहत दो महत्वपूर्ण दस्तावेज संसद में रखे। इनमें शामिल हैं मीडियम टर्म फिस्कल पॉलिसी-कम-फिस्कल पॉलिसी स्ट्रेटजी स्टेटमेंट और मैक्रो-इकोनॉमिक फ्रेमवर्क स्टेटमेंट। ये दस्तावेज बजट की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करते हैं।
GST 2.0 और अप्रत्यक्ष कर सुधारों का असर
FY27 का बजट उन सुधारों के बाद पहला है जिसमें GST 2.0 का महत्व बढ़ गया है। यह सुधार अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए लागू किया गया है।
-दो-दर संरचना: 5% और 18%
-अनुपालन लागत घटाना
-आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर कर भार कम करना
इन उपायों का उद्देश्य नागरिकों के जीवन-यापन की लागत घटाना और व्यापारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाना है।
निर्यात और वैश्विक आर्थिक दबाव
इस बजट का एक अहम पहलू है निर्यात प्रोत्साहन, खासकर तब जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया है। सरकार इस बजट के माध्यम से निर्यात बढ़ाने, घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में मजबूती बनाए रखने पर जोर देगी।
इकोनॉमिक सर्वे और बजट सत्र का समय
वित्त मंत्री ने पहले ही 2025-26 के लिए इकोनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया संसद में पेश कर दी थी। बजट सत्र कुल 65 दिनों में 30 बैठकों में संपन्न होगा और इसका समापन 2 अप्रैल को होगा। 9 मार्च को पुनः कार्यवाही शुरू होगी। स्थायी समितियां इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की Demands for Grants का विश्लेषण करेंगी।
स्थिरता, सुधार और विकास की दिशा
FY27 का बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह सरकार की वैश्विक दबावों से निपटने, संरचनात्मक सुधार लागू करने और विकसित भारत की दिशा तय करने की रणनीति को दर्शाता है। GST 2.0, निर्यात प्रोत्साहन और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से यह बजट आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा और नीति का रोडमैप तय करेगा।