नई दिल्ली: कांग्रेस और विपक्षी नेताओं द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर की गई आलोचनाओं ने बजट के प्रस्तुत होने के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ सरकार ने इसे 'विकसित भारत' की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे बेरोजगारी, गिरते विनिर्माण क्षेत्र, किसानों की दुर्दशा और बढ़ते वैश्विक संकटों से आंखें मूंदने वाला करार दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा केंद्रीय बजट भारत के 'असली संकटों' से बेखबर रहा। उनके सहयोगियों ने बजट को 'निराशाजनक' और 'नकली वादों' से भरा हुआ बताया है।
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने बजट के बाद अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि यह बजट भारत के असली संकटों पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने बेरोजगारी, गिरते विनिर्माण क्षेत्र, और किसानों के संकट की ओर इशारा किया, जिन्हें बजट में कोई समाधान नहीं दिया गया। राहुल ने ट्विटर पर लिखा कि बेरोजगारी बढ़ रही है, मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है, निवेशक अपना पैसा वापस ले रहे हैं और किसान परेशान हैं। इस बजट में इन सभी मुद्दों की अनदेखी की गयी है।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी एक गंभीर सवाल उठाती है-क्या सरकार आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है? या फिर यह बजट केवल राजनीतिक लाभ के लिए तैयार किया गया है, जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है?
जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस बजट को 'लैकलस्टर' और 'बिना किसी दिशा के' करार दिया। उनका कहना था कि बजट में बड़े बदलावों और सुधारों की कोई योजना नहीं है। "यह बजट बिल्कुल उबाऊ है, इसमें कोई नई दिशा नहीं है," रमेश ने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट में योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए किसी भी प्रकार का स्पष्ट बजटीय आवंटन नहीं दिया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बजट को कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बजट भारत की वास्तविक समस्याओं-जैसे गरीबी, बेरोजगारी और असमानता को नजरअंदाज करता है। खड़गे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के पास कोई नया विचार नहीं है और बजट की घोषणा केवल चुनावी रणनीति के तहत की गई है।
बजट की कमजोरियां
कांग्रेस ने यह भी कहा कि बजट में सामाजिक सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं और उपभोक्ता मांग को बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि कहां है 'मेक इन इंडिया' योजना? क्या सरकार की नीतियों ने रोजगार सृजन के मामले में कोई ठोस कदम उठाए हैं?" कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार ने सिर्फ वादे किए हैं, लेकिन उनका पालन करने की कोई योजना नहीं है।
इसके अलावा, कांग्रेस ने इस बात पर भी चिंता जताई कि बजट में सरकारी खर्चे को बढ़ाने का कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बजट में जो भी प्रॉजेक्ट्स हैं, वे सभी पुराने वादों का पुनरावृत्ति हैं। भारत के छोटे और मझोले उद्योगों को कोई राहत नहीं दी गई है। यह बजट गरीबों और मिडिल क्लास के लिए कोई राहत नहीं है।
क्या यह बजट सिर्फ अमीरों के लिए?
कांग्रेस के आरोपों में यह भी शामिल है कि यह बजट केवल अमीरों और बड़े उद्योगपतियों के फायदे के लिए है। राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने कहा कि सरकार ने न तो किसानों के लिए और न ही गरीबों के लिए कोई बड़ी योजना पेश की। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि क्या इस बजट में उन 95% लोगों के लिए कुछ है, जो गरीब और मिडिल क्लास का हिस्सा हैं?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार का ध्यान हमेशा 'चमचमाती योजनाओं' पर केंद्रित रहता है, जबकि वास्तविक समस्याओं का समाधान कभी नहीं किया जाता।
बजट का राजनीतिक पहलू: चुनावी तर्क?
विपक्ष का यह भी कहना है कि यह बजट चुनावी लिहाज से तैयार किया गया है। सरकार ने बजट में कई घोषणाएं की हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये घोषणाएं सिर्फ चुनावी लाभ के लिए हैं और इनका असर वास्तविक अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में देश के लिए कुछ करना चाहती है, तो उसे इन घोषणाओं से ज्यादा ठोस और वास्तविक उपायों की आवश्यकता है।
कांग्रेस के आलोचनात्मक रुख ने बजट 2026-27 को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इस बजट को सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए तैयार किया है, जबकि वास्तविक संकटों का समाधान इस बजट में कहीं दिखाई नहीं देता। जहां एक तरफ सरकार इसे 'विकसित भारत' की ओर एक बड़ा कदम मानती है, वहीं विपक्ष इसे 'नकली वादों' और 'नकली सुधारों' का एक और उदाहरण मानता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन सवालों का कैसे जवाब देती है और क्या इस बजट से वास्तविक सुधार और राहत मिल पाती है।