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बजट 2026ः दिवाला मामलों में सुधार के लिए NCLT की मजबूत संरचना जरूरी: रावत

अनूप रावत का सुझाव-बेंच बढ़ाओ, समाधान तेज करो: IBC के लिए बजट में यह कदम जरूरी।

By श्वेता सिंह

Jan 31, 2026 18:23 IST

नयी दिल्लीः सरकार को आगामी यूनियन बजट में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि दिवालियापन के मामलों और बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत मामलों की प्रक्रिया अधिक कुशल और तेज हो सके। शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी (SAM) के नेशनल प्रैक्टिस हेड अनुप रावत ने एएनआई से यह बात कही। उन्होंने कहा कि “हमें NCLT के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। अधिक बेंचें और संसाधन चाहिए ताकि दिवालियापन मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके।” उन्होंने यह इंटरव्यू यूनियन बजट 2026-27 से ठीक पहले दिया, जो रविवार को संसद में पेश किया जाएगा।

रावत ने कहा कि IBC ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार हमेशा कोड में बदलाव और सुधार के लिए सक्रिय रही है, चाहे वह महामारी जैसी आर्थिक परिस्थितियों के लिए हो या कर्जदाताओं और अन्य हितधारकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने कोड के कार्यान्वयन के अनुभव के आधार पर कई अहम सुधार किए हैं, जिनमें नए क्रेडिटर-लीड रेजॉल्यूशन फ्रेमवर्क और क्रॉस-बॉर्डर दिवालियापन के प्रावधान शामिल हैं। रावत का मानना है कि ये सुधार निवेशकों का भरोसा और देश के रिस्क मैनेजमेंट ढांचे को और मजबूत करेंगे।

वर्तमान समय में IBC की सबसे बड़ी चुनौती देरी और कम रिकवरी रही है। रावत ने कहा, “सच कहूं तो देरी और कम रिकवरी स्थिरीकरण चरण में सामान्य हैं, लेकिन यह कोड असाधारण रूप से प्रभावी रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ क्षेत्रों में अभी भी ध्यान देने की आवश्यकता है, जिनमें संस्थागत मजबूती और बेंच की संख्या बढ़ाना प्रमुख हैं।

नए IBC संशोधनों के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा, “बिलकुल। इन संशोधनों से मामलों का समाधान तेजी से होगा।” उन्होंने बताया कि नए संशोधन एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं, ताकि प्रबंधन और कर्जदाता मिलकर समाधान निकाल सकें। यदि यह संभव नहीं हुआ, तो CIR प्रक्रिया के तहत इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल मामले की देखरेख करेंगे।

रावत ने कहा कि NCLT और NCLAT हमेशा व्यस्त रहेंगे, क्योंकि मामलों की संख्या सीधे आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। संशोधन के बाद मामलों को स्वीकार करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यह संशोधन मौजूदा बजट सत्र में संसद में पेश किया जाएगा।

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