बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का कोई सवाल ही नहीं उठता। पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसे सपने देखने वालों को भारत के कानून के दायरे में रहना सीखना होगा।
कानून से ऊपर कोई नहीं
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कयामत का दिन आने की सोच में जीने के बजाय देश के कानूनों का पालन करना जरूरी है। भारत में रहने वालों को संविधान और कानून के मुताबिक ही जीवन जीना होगा। नियम तोड़ने वालों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
कानून तोड़कर जन्नत का सपना कभी पूरा नहीं होगा
योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कानून तोड़कर स्वर्ग या जन्नत पाने का सपना देखने वालों का सपना कभी साकार नहीं होगा। ऐसे रास्ते अंततः व्यक्ति को विनाश की ओर ही ले जाते हैं।
अवसरवादियों पर हमला, भगवान राम का हवाला
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक अवसरवादियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं और हालात सुधरते ही भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को अब भगवान राम ने भी भुला दिया है और वे आगे कभी सफल नहीं हो पाएंगे।
रामभक्तों पर गोली चलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं
1990 की अयोध्या घटना का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलाने वालों और रामद्रोहियों के लिए अब देश में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का भारत ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं करेगा।
बाबरी विध्वंस और उसके बाद का सच
गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी। इसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे भड़के, जिनमें एक हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे, जिन्होंने घटना के कुछ घंटों बाद इस्तीफा दे दिया था और बाद में उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना भी करना पड़ा।
राम मंदिर उद्घाटन के बाद बदला राजनीतिक संदेश
अयोध्या में राम मंदिर का भव्य उद्घाटन जनवरी 2024 में हुआ था। इसके बाद से राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में राम मंदिर और अयोध्या को लेकर संदेश और रुख और अधिक स्पष्ट व आक्रामक होता गया है।