जयपुर : सवाई मान सिंह अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ जन्मजात 11 वर्षीय बच्चे की जान बचा ली। अस्पताल प्रशासन ने यह जानकारी दी है कि जन्मजात डायफ्रामेटिक हर्निया से पीड़ित बच्चे की जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
अलवर निवासी यह बच्चा पिछले दो महीनों से सांस फूलने और सीने में दर्द की समस्या से परेशान था। चलने या दौड़ने पर उसकी परेशानी और बढ़ जाती थी। लगभग दो सप्ताह पहले वह अस्पताल के ओपीडी विभाग में परामर्श के लिए आया था। जांच के दौरान पता चला कि उसे जन्मजात डायफ्रामेटिक हर्निया नामक बीमारी है, जो जन्म से ही मौजूद थी।
अस्पताल के बयान के अनुसार डायफ्राम, जो छाती और पेट की गुहा को अलग करने वाली मांसपेशी होती है, उसमें दोष होने के कारण लीवर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा, पित्ताशय और आंतों का बड़ा भाग छाती के दाहिने हिस्से में पहुंच गया था।
इस वजह से बच्चे का दाहिना फेफड़ा बुरी तरह दब गया था, जिससे वह ठीक से फैल नहीं पा रहा था। परिणामस्वरूप बच्चा लगभग एक ही फेफड़े के सहारे जीवन जी रहा था।
जन्मजात डायफ्रामेटिक हर्निया एक दुर्लभ बीमारी है और सामान्यतः यह शरीर के बाएं हिस्से में पाया जाता है। दाहिने हिस्से में इसका होना अत्यंत दुर्लभ है, जिससे यह मामला सर्जरी की दृष्टि से और भी चुनौतीपूर्ण बन गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया। सामान्यतः ऐसे मामलों में पेट और छाती को खोलकर बड़े चीरे के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है।
लेकिन इस मामले में डॉक्टरों की टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का फैसला किया, जो तकनीकी रूप से अधिक कठिन होती है। पूरी सर्जरी केवल तीन छोटे चीरे लगाकर की गई और सभी खिसके हुए अंगों को सावधानीपूर्वक वापस पेट के हिस्से में स्थापित कर दिया गया।
अस्पताल के अनुसार ऑपरेशन के सात दिन बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।