इंदौर: दूषित पानी के कारण ही इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी और डायरिया का प्रकोप फैलने की पुष्टि प्रशासन ने की है। गुरुवार को सामने आई एक लैब रिपोर्ट के आधार पर यह जानकारी दी गई। गौरतलब है कि डायरिया के इस प्रकोप में अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1400 लोग संक्रमित हुए हैं। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधवप्रसाद हसानी ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में डायरिया फैलने की वजह दूषित पानी है। पीने के पानी की पाइपलाइन में छेद होने के कारण उसमें गंदा पानी मिल गया था। हालांकि उन्होंने रिपोर्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
भागीरथपुरा इलाके में पेयजल की समस्या की शुरुआत 25 दिसंबर को हुई थी। उस दिन स्थानीय लोगों ने नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी में बदबू आने की शिकायत की थी। कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर नगर निगम के पास भी गए थे लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने इस पर खास ध्यान नहीं दिया। इसके बाद इलाके में जलजनित बीमारियां फैलने लगीं। एक बच्चे सहित कई लोगों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। इलाके में डॉक्टरों की टीम तैनात की गई और विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरी जांच के आदेश दिए।
सूत्रों के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र की मुख्य पेयजल पाइपलाइन में एक छेद पाया गया है, जिससे दूषित पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पाइपलाइन में कहीं और भी लीकेज है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल भागीरथपुरा में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने लोगों से पानी उबालकर पीने की अपील की है। संजय दुबे ने बताया कि पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आश्वासन दिया है इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।