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देहरादून में त्रिपुरा के युवक की मौत: न्याय की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन

उत्तर-पूर्व के छात्र संगठनों ने जांच में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

By कौशिक दत्त, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 01, 2026 12:20 IST

देहरादून: देहरादून में त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा की मौत को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में देहरादून में एमबीए के छात्र एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि नस्लीय भेदभाव के कारण उन पर चाकू से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना में न्याय की मांग को लेकर उत्तर-पूर्व भारत के छात्रों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नॉर्थईस्ट स्टूडेंट्स सोसाइटी ऑफ दिल्ली यूनिवर्सिटी (एनईएसएसडीयू) के बैनर तले किया गया। संगठन और चकमा स्टूडेंट्स यूनियन का आरोप है कि पुलिस ने शुरू से ही इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जांच में भी लापरवाही बरती जा रही है।

एनईएसएसडीयू के अध्यक्ष पॉन्टिंग थोकचम ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एंजेल के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की। उनका कहना है कि पहले भी उत्तर-पूर्व भारत के छात्रों पर नस्लीय टिप्पणियों के साथ हमले हुए हैं और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष कानून की जरूरत है। वहीं, ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट्स यूनियन के उपाध्यक्ष विपुल चामकर का कहना है कि उत्तराखंड पुलिस की जांच में लापरवाही के कारण ही छात्रों को न्याय की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना पड़ा।

गौरतलब है कि 9 दिसंबर को देहरादून के एक बाजार में एंजेल चकमा पर हमला किया गया था। आरोप है कि एंजेल और उनके भाई माइकल चकमा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिनमें जाति और नस्ल से जुड़ी बातें शामिल थीं। उन्हें ‘चाइनीज’ कहे जाने का भी आरोप है, जबकि एंजेल ने खुद को भारतीय बताया था। इन टिप्पणियों का विरोध करने पर कुछ लोगों ने कथित तौर पर नशे की हालत में उन पर धारदार हथियार से हमला किया। हमले के 17 दिन बाद, 26 दिसंबर को अस्पताल में उनकी मौत हो गई। परिवार और चकमा समुदाय का आरोप है कि घटना की जड़ में नस्लीय भेदभाव था लेकिन शुरुआत में पुलिस एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं थी।

इस मामले में देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने पहले कहा था कि आरोपियों की टिप्पणियों को ‘नस्लवादी’ नहीं माना जा सकता और वे मजाक में कही गई थीं। हालांकि बाद में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार है। पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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